क्षत्रिय और दलित

कुँवरानी निशा कँवर नरुका
शूद्र शाब्दिक दृष्टि से आशुद्रव शब्द से व्युत्पित है जिसका अर्थ है शीघ्र ही द्रवित यानि पिघल जाना |यानि जल्दी ही अपने को कि और में समिलित कर लेना |द्रवित होने वाला पदार्थ किसी भी अन्य पदार्थ के साथ अपने को समाहित कर सकता है |यह बहुत उच्च कोटि के व्यक्तियों में ही समायोजन का गुण होता है | शूद्र के बारे में पितामह भीष्म ने कहा कि यदि किसी के कुलमे कोई श्राद्ध करने वाला न हो तो उसके शूद्र को भी यह अधिकार है क्योंकि शूद्र तो पुत्र तुल्य हो है |कुछ लोगो का तर्क है कि शूद्रों कि उत्पत्ति श्री भगवान के चरणों से हुयी है इसलिए यह नीचें है उनसे मै यह पूंछना चाहती हूँ कि “वे लोग श्री भगवान के चरणों का पूजन करते है यह कि मुख और हृदय का ????” यदि चरणों का ही तब तो शूद्र अति-आदरनीय और पूज्य हुए ना ??? हम अपने गाँव में आज भी अनेक परम्पराव पर शूद्रों का पूजन करते है चाहे वो मकर-सक्रांति हो या कोई भी शुभ कार्य उसमे सबसे पहले मेहतर और महत्रानीजी को ही नेग देकर उन्हें सम्मानित किया जाता है |
हम यदि भगवान श्री राम के समय से ही देखें तो पाएंगे कि दलितों के साथ शुरू से ही हम क्षत्रियों का व्यव्हार बहुत ही सम्मान जनक रहा है |श्री राम के निषाद-राज के साथ मैत्री-पूर्ण सम्बन्ध केवट के प्रति सहदयता जग-जाहिर है| एक और भी बड़ा ही भाव-पूर्ण प्रशंग है कि भरतजी जब श्री राम से मिलने जारहे थे तो रस्ते में निषाद-राज मिले तो उन्होंने निषाद-राज से गले मिलने से यह कह कर मन कर दिया कि जिस गले से मेरे पूज्य और अराध्य श्री राम लग चुके है और वह उनका मित्र है उसके तो मै सिर्फ चरण स्पर्श ही कर सकता हूँ |और इसके बाद श्री राम द्वारा वानर और भालू जैसी आदिम-जातियों के साथ मैत्री-पूर्ण संधि और उनकी ही सहायता से दैत्य-ब्राह्मणों (दिति और कश्यप ब्रह्माण ऋषि के वंशजो ) का संहार करके माता सीता को आजाद करवाया था |
उसके बाद राज-सरिथि अधिरथ और संजय को मंत्री का स्तर औरयह सर्व-विदित है कि सारथि सबसे बड़ा हितेषी और मित्र होता है |और अधिकांश सारथि शुद्र ही हुआ करते थे |अब इतना पुराणी बैटन को यदि न भी याद करें तो भी महाराणा प्रताप कि सेना में भील जाति कि न केवल भरमार थी बल्कि पूंजा राणा भील को राणा का दर्जा था और अंग-रक्षक दल के प्रमुखों में एक थे |मेवाड़ के राज्य-चिन्ह में राजपूत और भील दोनों को जगह देकर भीलों को सम्मानित किया गया है |फिर यह छुआछुत प्राचीन-काल से नहीं होसकती और यह सास्वत भी नहीं है इसे निश्चित रूपसे किन्ही राजनैतिक षड़यंत्र के तहत प्रचलित किया गया होगा | इसलिए यह बात शत प्रतिशत सही है कि यह छुआ-छूत किसी षड़यंत्र के तहत ही प्रचलित कि गयी, जिसमे हमारे राजनितिक विरोधी जिनमे रावण और परशुराम के वंशजो का विशेष योगदान है| ने हमे हमारी प्राणों से भी प्रिय प्रजा, जिसके वास्तव में हम ऋणी है और दास हुआ करते थे , उसीके साथ हमारे ही हाथों से अन्याय करवाया है |…
और दुर्भाग्य कि हम आज भी अपने परंपरागत शत्रुओं को नहीं पहिचान कर ,नितांत भोली जनता जिसे अभी कुछ राहत और सम्मान की आशा की किरण दिखाई दी है ,उसी के विरुद्ध है |और अपने अतिप्राचीन काल से अलग-अलग तरीके से शत्रुता निभारहे लोगो के मानसिक दास बनकर अपने पूर्वजों(राम,भीष्म ,कृष्ण ,बुद्ध ,रामदेवजी तंवर ,मल्लीनाथजी,गोगाजी चौहान, यहातक कि वर्तमान समय में भी वि.प्र.सिंह जी) की बाते हमने नहीं मानी और आज भी मानने को तैयार नहीं है |उस ही का परिणाम जिसकी रक्षा का भार हम क्षत्रियों पर था, उसी(दलितों) का हमने खूब उत्पीडन करना शुरू कर दिया है |जब जातीय छुआछुत हमारे समाज में जिसने भी, जब भी, जिसभी कारण से घुसाई, तो हमने उसे मृत्यू-दंड देना उचित न समझ कर उल्टा उसे ही सर पर बैठा लिया है |उसका परिणाम आज क्षत्रिय समाज में से कितनी ही जातिया अलग होगई और दलित जो हमारे पूर्वजो ने सर्वाधिक पूजनीय बताया था भी जानवरों जैसी स्थिति में पहुँच गया था |यह परिणाम था हमारी भूले थी केवल हमारी मानसिक दासता का |क्या हमने आज इस दासता से मुक्ति पाली है ,मुझे लगता है शायद नहीं |,तो फिर देर किस बात कि पहिचानो अपने शत्रुओं को और उस समय कि भूल को सुधारो, और जरुरत पड़े तो दंड दो उन मानवता के शत्रुओं को |

“जय क्षात्र-धर्म “

कुँवरानी निशा कँवर नरुका
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

21 Responses to "क्षत्रिय और दलित"

  1. डॉ. मनोज मिश्र   January 16, 2011 at 3:18 pm

    अच्छी तार्किक प्रस्तुति,आभार.

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  2. Rahul Singh   January 16, 2011 at 3:47 pm

    सभी जातियों की अपनी भूमिका रही है, महत्‍व रहा है, लेकिन अब जातियां इस सीमा में रहने को अपमानजनक मानती हैं.

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  3. राज भाटिय़ा   January 16, 2011 at 6:00 pm

    बहुत सुंदर जी, जातिया तो हर समाज मे होती हे.

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  4. arganikbhagyoday   January 17, 2011 at 4:36 am

    sach to sach hi hota hai !

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  5. प्रवीण पाण्डेय   January 17, 2011 at 5:50 am

    अब राजनीति की रोटियाँ खाने वालों को ऐसी ही विषयों की आँच चाहिये, उसे भी शीतल कर देंगी आप तो इनका क्या होगा? बहुत ही सुन्दर आलेख।

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  6. वर्ण व्यवस्था के पारस्परिक महत्व मंथन की दशा में हैं। यह चर्निंग होनी चाहिये। जो निकलेगा, वह नवनीत ही होगा!

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  7. Dr. Mandhata Singh   January 18, 2011 at 3:07 pm

    हमारे समाज में आज जो विकृतियां घृणा के स्तर तक दिख रही हैं वह शायद मूल रूप में कभी थी ही नहीं। मसलन महिलाओं के बारे में तुलसी दास के रामायण में ताड़न के अधिकारी बताना भी मूल साहित्य में कभी की गई गड़बड़ी ही लगती है। जातियों को घृणित तरीके से एक दूसरे से दूर किए जाने की साजिश। और धर्म को पाखंड में बदल देने जैसी बातें समाज के शक्तिशाली बन चुके लोगों के स्वार्थ की साजिश ही कही जा सकती है। यह आज भी साफ दिख रहा है। राजनीति के ठेकेदारों की यह कोशिश तो बेशर्मी के स्तर पर जारी है। इस सिलसिलें में लोगों में जागृति लाने की जरूरत है। कुँवरानी निशा कँवर नरुका ने अपने एक लेख में दलितों, शूद्रों व क्षत्रियों के बीच बेहतर सामंजस्य को बताने की कोशिश की है। यह उन लोगों को सोचने को मजबूर करेगी जो इन दोनों में शोषक और शोषित का ही नाता जानते हैं।

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  8. Vijay Kumar Nishad   September 10, 2012 at 7:18 am

    Ratan ji Jai mata Ji Ki ,
    Lekh mujhe bahut hi accha laga lekin ek cheez main bhi clear karana chahta hu ki Nishad raj Dalit kaise the ye to galat hai agar wo dalit hote to Lord ram & Guhhraj Nishad ek hi Gurukul me nahi padhe hote.kshtriya kaun hota hai,wo hota hai go dusaron ko saran (chatra) deta ha,Jo Jeevan daan deta hai,Rajput Kaun hota hai Raja ka putra..Raja ke putra to hum bhi hai hamare purvaj bhi raja the.Ganga ji ke tatt se lekar Arawali tak nishad samrajya tha (Refrence of Mahabharat)Rajasthan ke Bhilwara,Dungarpur,Udaipur etc. Bhil bahul chetra hai.Udaipur (City palace)me jo gold ka suraj hai jisko dekh kar Rana pratap ji paani piya karte the usme pehle Bhilu Raja ka phil Surya aur Baad me Maharana Pratap ka chitra ankit hai.Prithvi Raj Chauhan ne Bhilon se Sabd Bhedi Bannd Shiksha li thi.

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    • P.S. Thakur   August 31, 2017 at 6:00 am

      Bhai is time Dalit nhi hua krte the Dalit to muslimo ka bnaya gya word hai us time sudra hua krta that
      Us time sbhi log ak hi sath shiksha grahn krte the chahe WO koi bhi ho

      Reply
  9. Vijay Kumar Nishad   September 10, 2012 at 7:22 am

    Pandav – Kaurav kasa se hue,ek Nishad Kanya Satyawati se.Jis Bharat ke naam par desh ka naam Bharat pada uski maa bhi to Nishad kanya thi Sakuntla.18 Purano ki Rachna karne wale Ved Vyas bhi to hamare hi hai.Veer eklavya ne Krishna ko saran di thi jab Sishupal & Jarasandh unko marne ke liye pichepade the.Krishna ko kisne mara humne jinhone sare Maharathiyon ko Mokch diya Humne unko Mokch de diya.Bhel se Bhil aap batao ki hum Shiv putra bade hai ki aap surya putra.geeta Bade ki Ved. Nishad raj ke pass apni Navsena thi jisper swastik ka nishan tha jo aaj Hinduon ka pavitra chinha hai.Kshtriya ek Misrit (mixed)Jaati (Caste) hai jisme Shak,Huund aadi jaatiya mile hai lekin hum nahi.

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  10. Vijay Kumar Nishad   September 10, 2012 at 7:24 am

    Ratan ji hamara Gotra bhi kasyap hai jo Manu ka tha jinse kaha jata hai ki jivan ki utpaati hai.Science kehta hai ki aadimanav jo jangalon,Gufaon,Naadi ki kandraon aadi me Nanga rehta tha kaacha meat khata tha,usse aage chal kar jivan ki suruaat hue.Ashbhya se sahbya hua jata hai Sabhya se ashabhya nahi.Hm aadi manav hai hamare Baad Manu aur duniya hui hai…….Apne Brahman kehne wale to Madhya Asia se aaye hai,Jinho ne aakar humko dabaya aur Varna Vevastha ki Ye to rishiyon ka desh hai Rishi,tapasvi matalab Brahman nahi tha.Valmiki,Vashistha etc.Brahman nahi the. Ram ji Poore jivan kaal me bramhano ke Aatank se Pilit the Ravan jise Rakchas kaha jata hai wo kya tha.Jangal Nadiyan sabpar hamara raj tha Lekin jaise afganni,Mugalon,naadi ne desh ko luta aur yaha ka vastavik itihaas Dhumil kiya waisa hi Brahmano ne hamare saath kiya.Ratan ji aap apne aapko Kshtriya kehta ho to mujhe ye bataye ki AApke poorvej kya aadi Manav nahi the, aap bhi hamara hi aang ho ye saare duniya.Ek chote bacche ko apni Maa se lagaw kyu hota hai kyuki wo janta hai ki wo uski jaroorton ko mura karte hai lekin Lugai aane ke baad wo maa ko bhul jata hai.Aap Humse nikal kar Sabhya ho gaye aur hum Jangal tak hi reh gaye to hum "Nicch" aur Dalit hai.Tulsidas ne poore Ramayan ko kharab kar diya Valmiki Ramayan ko Padho kaha usme BHED BHAV hai.Vijeeta Itihaas likhta hai aur likhwata hai.Yahi karan hai ki aaj hamare itihaas ki jyadatar ghatanaon par lekhkon ke Matbhed hai.Hamar sampurna itihaas dhumil hai.Apna dharm hindu nahi Sanatan hai jo nirantar chalta rehta ha.Hindu to England ke aangraz kehte the kyuki vo sindhu naadi ka uucharan Hinhu ke roop me harte the isleye sindhu naadi ke puurva disha me rehne wale hum hindu ho gaye.Lekin aaj apne aap ko kaun sanatan dharmi kehta hai sab apne aapko Hindu kehta hai,Aise hi saabhi aapni Vastvikta ko bhool jate hai.Hamara Beshan Ka ladoo Hanuman ji ko chadhta hai,Hamara Bhel ka patta Shiv ji ko chadhta hai to Batao "Dalit" kaun hai. Ram ji ko hamne paar lagaya.Tulsi das ne Kewat ko nicch bataya hai lekin sayad tulsidas ko ye pata nahi tha ki wo kewat Ram ji 9 (nine)janamo se intajar kar raha tha,Wopehle janam me Baheliya tha,phir Kachua (Tortoise)aise hi kaij janamon ke baad bhagwan ne unko darshan diya Aise hi nahi bhagwan unpe prasaan ho gaye the.Ved utha ke padiye Nishad ke baare me aapko pata chal jayega ki Nishad Chaar varno se alag ek pancham varna tha.Isko koi Brahman galat nahi keh sakta lekin wo ise sahi bhi nahi kahega kyuki uskakiya hu saab galat sabit ho jayega.Aaj hamare samaj me jo jaatiwaad hai uske sansthapak ye Brahman hi to hai.Kis Brahman ko aaj Brahm ka jyaan hai Baataye.bAHUT KUCH LIKHNA CHAHTA HU LIKIN ABHI ITNA HI. "JAI SHRI RAM" "Jai Guhhraj Nishad" "Jai veer Eklavya"

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    • kunwarani nisha kanwar   May 16, 2013 at 4:23 pm

      Nishad ji apke purvaj aur hamare purvajo me koi bada ya chhota nahi tha jab,,,shri ram se milane bharat ji gaye the nishadraj guh ke pas tab nishadraj ek bade raja aur rajkumar ke nate bharat ji se gale milna chah rahe the tab bharat ji ne nishad raj se kaha ki aap mere bade bhai shri ram ke mitra hai aur unhone apse gale mil liya hai isliye mai ab keval apke charan sparsh kar sakta hu aur apko sath chalne ke liye vinati karta hu ,,,,,,,,,,to hamare aur apke purvajo me shuru se ekta rahi hai kabhi matbhed nahi raha yah to pando ne ab jakar kapol kalpnao par matbhed kiya hua hai ,,,,,,,,,,,,,,,

      Reply
    • dc nishad   May 3, 2017 at 8:18 am

      YOU ARE RIGHT VIJAY NISHAD JI I SUPPORT YOU
      JAI NISHAD RAJ

      Reply
  11. Tulsi Ram Mundetia   March 23, 2013 at 9:41 am

    kunwaraniji nisha kanwar narukaji ap bhi shudron ke liye eisa likh sakhti h khusi hui mera apko salam.

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    • kunwarani nisha kanwar   May 16, 2013 at 4:24 pm

      duniya me kritaghanta se bada koi pap nahi hai shudra aur dalito ka ham kshatriyo par bahut bada ahashan hai ise bhulaya nahi jasakta ,,Tulsiram ji,,,

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  12. Kapil Kumar   April 24, 2016 at 12:38 pm

    bahut badhiya hai ji ? very good

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  13. Mishrilal Kachhawaha   April 4, 2017 at 2:26 pm

    YAH EK ADBHUT SACHCHHAI HAI ;;;TRUTH SPEAKS IT SELF ;;;AGAR HUM SABHI AMAL KARENGE TO BHARAT PHIR SONE KI CHIDIYA BANEGA ;;

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  14. JEET   April 17, 2017 at 2:04 am

    Bhil janjati dalit nhi h,galat likha h ye sab

    Reply
  15. dc nishad   May 3, 2017 at 8:09 am

    YOU ARE RIGHT VIJAY NISHAD JI I SUPPORT YOU
    JAI NISHAD RAJ

    Reply
  16. Rajputi Rakhije   August 17, 2017 at 1:38 pm

    जय हो

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  17. P.S. Thakur   August 31, 2017 at 6:14 am

    आपने बस एक गलती कर दी कि उस समय दलित शबद ही नही था , ये शब॒द तो मुसलमानों ने बनाया
    आपने देखा होगा कि कुछ शूद्रभाई सुअर पालन करते है सुअरों के आस पास भी मुसलमान नही जाता है
    इसलिए धम्रपरिवत्न से बचने के लिए इन लोगो ने अपने गांव,शहर मे सुअर रखने लगे ताकि मुसलमाों से ये अपना बचाव कर सके।
    पर हमारे समाज के लोगो ने इनका सममान से वापसी कराने की जगह इनका अपमान करने लगे

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