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Sunday, May 22, 2022

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क्यूँ यह दुनियां ?

सभी ब्लॉग पाठको को मेरा नमस्कार|
यह मेरी ब्लॉग जगत में पहली पोस्ट है , ब्लॉग जगत मै ही क्या मैंने अपने जीवन में पहली बार कुछ लिखा है , जो मै आप सब लोगों के साथ बांटना चाहती हूँ …|
प्रस्तुत है आप सब लोगों के समक्ष मेरी कविता – ” क्यूँ यह दुनियां?”

क्यूँ यह दुनियां ?
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
कोई किसी को नहीं समझता यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां क्या समझाना चाहती है..
हर चहरे के पीछे छुपा है एक चेहरा यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां भोली बनना चाहती है …
कोई किसी का नहीं है अपना यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां अपना बनाना चाहती है …
जीना नहीं है किसी को यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां जीने की आस लगाती है …
नहीं है कोई जीवन की सत्यता यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां इस असत्य को अपनाती है ….
किसी का कुछ नहीं यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां कुछ हासिल करने की होड़ लगाती है …
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
पर फिर भी जीना सीखती है ये दुनियां, हाँ ये दुनियां |
कु.राजुल शेखावत

असिस्टेंट कमान्डेंट राज्यश्री राठौड़ :राजस्थान की पहली महिला पायलट |
ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार
ताऊ पहेली – 85 (जगन्नाथ मंदिर, पुरी, उडीसा)

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22 COMMENTS

  1. पहली कविता अच्छी लिखी है राजुल.
    क्यूँ है/ क्यूँ ऐसी है ये दुनिया इसी का उत्तर तलाशते जिंदगी गुजरती जाती है ,यही जिंदगी की सच्चाई है.
    @[कविता की आखिरी पंक्ति में 'आसन नहीं 'को 'आसान नहीं' है कर लें .]

  2. आपके प्रश्न और उसके उत्तर, दोनो ही समुचित हैं दुनिया के सन्दर्भ में। आपकी पहली कविता में यह सुलझन है। ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। शुभकामनायें।

  3. प्यारी राजुल
    प्यार
    और ब्लोग की दुनिया में तुम्हारा स्वागत.
    किसने कहा दुनिया बुरी है? यहाँ अच्छे लोगों और अच्छाइयों की भी कोई कमी नही बेटा.
    दुनिया और इसमें रहने वालों से इतनी शिकायते ! इतनी छोटी-सी उम्र में? ये दुनिया बहुत खूबसूरत है.यहाँ कदम कदम पर तुम्हे प्यार,दोस्ती,अपनापन,रिश्तों की खूब सुरती भी मिलेगी.ये तो हम पर डिपेंड करता है कि हम क्या चुनते हैं? गंदगी कहाँ नही होती? ये गंदगी ना होती तो पाकीजगी की कद्र कौन करता? बदसूरती के कारण ही तो ख़ूबसूरती ने अपना वजूद बनाये रखा है. है ना?
    जीवन का जोश,उमंग,उल्लास के साथ स्वागत करो.
    इसके काले पक्ष को नजर में रखो ये तुम्हे 'गम' नही होने देंगे पर इन्हें जीवन पर हावी ना होने दो ना खुद पर ना व्यक्तिगत जीवन पर.
    उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभ कामनाएं और…….
    बी पोजिटिव .

  4. प्रिय राजुल
    अपने मन के भावों को अभिव्यक्त करने का अंदाज बढ़िया लगा , आज पहली बार पता चला कि मेरी छुटकी इतनी गहराई से सोचती है |
    पर बेटा इंदु पूरी जी की सीख हमेशा याद रखना |

  5. जीना नहीं है किसी को यहाँ ….
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां जीने की आस लगाती है

    जीवन की असलियत को बयान करती कविता है? आज तक जो अनसुलझे यक्ष प्रश्न है उन्हीं को उकेरा गया है.

    परंतु निसंदेह जब तक आस है तब तक दुनियां है. आस गयी कि फ़िर क्या है? जिंदा मुर्दा सब बराबर….यही सूफ़ीज्म की पराकाष्ठा है.

    बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम

  6. pahale to ……we lov u lot rajul………..dusri bat i lov u rajul ……….tisri bat lov u so much ……..aaj papa bhut khush hai na ? kyu nahi honge aakhir unki pyari gudiya badi jo ho gai h……..aur ha bs wahi dohrana chahugi jo indu puri ji ne kaha h bas…….isase jyada m kuch nahi kah sakti ……….kyu ki m bhi itni badi nahi hu abhi ……….bas ak bar aur we lou uuuuuuuuuu lot……….keep smile allwayes….lov u

  7. हर चहरे के पीछे छुपा है एक चेहरा यहाँ …..
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां भोली बनना चाहती है …
    कोई किसी का नहीं है अपना यहाँ ….
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां अपना बनाना चाहती है

    बहुत सुन्दर पंक्तियां
    आपकी कविता बहुत पसन्द आई

    प्रणाम स्वीकार करें

  8. indu puri ji mai aapki baat se bilkul sahmat hun..or hamesha yaad rakhungi…..
    lekin meri kavita abhi poori nahi hui….jald hi iske aage ki rachna post ki jayegi….
    aap sab logo ka aabhar….
    dhanyawaad….!!

  9. सबसे पहले तो ब्लोगजगत मे स्वागत है आपका।
    कविता ज़िन्दगी कि पहेली सुलझाने की कोशिश कर रही है और वो ही हम सभी कर रहे होते हैं मगर ज़िन्दगी एक अबूझ पहेली है जितना सुलझाओ उतनी हि उलझती जाती है।

  10. स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में , पहली पोस्ट , और पहली कविता (ब्लॉग पर ) के लिए भी बधाई । भावाव्यक्ति प्रभावी है । लिखते रहें , शुभकामनाएं

  11. आपने अपने वजन से कई गुना भारी सवाल कर दिए है | मै अपनी बारह वर्षीय बच्ची के सवालों का जवाब नहीं ढूंढ पाया तो आप तो उससे काफी बड़ी है | पहली पोस्ट का स्वागत है | निरंतर लिखे और लिखते रहे यही कामना है |शुभ आशीष |

  12. राजुल बाईसा पहली ही पारी में सतक सा………
    बहुत गहरी बात…अपनी कलम से……..
    बधाई और भी लिखे सा…….

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