क्यूँ यह दुनियां ?

क्यूँ  यह दुनियां ?

सभी ब्लॉग पाठको को मेरा नमस्कार|
यह मेरी ब्लॉग जगत में पहली पोस्ट है , ब्लॉग जगत मै ही क्या मैंने अपने जीवन में पहली बार कुछ लिखा है , जो मै आप सब लोगों के साथ बांटना चाहती हूँ …|
प्रस्तुत है आप सब लोगों के समक्ष मेरी कविता – ” क्यूँ यह दुनियां?”

क्यूँ यह दुनियां ?
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
कोई किसी को नहीं समझता यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां क्या समझाना चाहती है..
हर चहरे के पीछे छुपा है एक चेहरा यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां भोली बनना चाहती है …
कोई किसी का नहीं है अपना यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां अपना बनाना चाहती है …
जीना नहीं है किसी को यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां जीने की आस लगाती है …
नहीं है कोई जीवन की सत्यता यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां इस असत्य को अपनाती है ….
किसी का कुछ नहीं यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां कुछ हासिल करने की होड़ लगाती है …
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
पर फिर भी जीना सीखती है ये दुनियां, हाँ ये दुनियां |
कु.राजुल शेखावत

असिस्टेंट कमान्डेंट राज्यश्री राठौड़ :राजस्थान की पहली महिला पायलट |
ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार
ताऊ पहेली – 85 (जगन्नाथ मंदिर, पुरी, उडीसा)

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