क्यूँ यह दुनियां ?

क्यूँ  यह दुनियां ?

सभी ब्लॉग पाठको को मेरा नमस्कार|
यह मेरी ब्लॉग जगत में पहली पोस्ट है , ब्लॉग जगत मै ही क्या मैंने अपने जीवन में पहली बार कुछ लिखा है , जो मै आप सब लोगों के साथ बांटना चाहती हूँ …|
प्रस्तुत है आप सब लोगों के समक्ष मेरी कविता – ” क्यूँ यह दुनियां?”

क्यूँ यह दुनियां ?
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
कोई किसी को नहीं समझता यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां क्या समझाना चाहती है..
हर चहरे के पीछे छुपा है एक चेहरा यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां भोली बनना चाहती है …
कोई किसी का नहीं है अपना यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां अपना बनाना चाहती है …
जीना नहीं है किसी को यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां जीने की आस लगाती है …
नहीं है कोई जीवन की सत्यता यहाँ …..
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां इस असत्य को अपनाती है ….
किसी का कुछ नहीं यहाँ ….
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां कुछ हासिल करने की होड़ लगाती है …
दुनियां में नहीं कोई बुरा यहाँ …
पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां उसे बुरा बनाती है …
आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
पर फिर भी जीना सीखती है ये दुनियां, हाँ ये दुनियां |
कु.राजुल शेखावत

असिस्टेंट कमान्डेंट राज्यश्री राठौड़ :राजस्थान की पहली महिला पायलट |
ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार
ताऊ पहेली – 85 (जगन्नाथ मंदिर, पुरी, उडीसा)

22 Responses to "क्यूँ यह दुनियां ?"

  1. अल्पना वर्मा   August 3, 2010 at 2:00 pm

    पहली कविता अच्छी लिखी है राजुल.
    क्यूँ है/ क्यूँ ऐसी है ये दुनिया इसी का उत्तर तलाशते जिंदगी गुजरती जाती है ,यही जिंदगी की सच्चाई है.
    @[कविता की आखिरी पंक्ति में 'आसन नहीं 'को 'आसान नहीं' है कर लें .]

    Reply
  2. प्रवीण पाण्डेय   August 3, 2010 at 2:21 pm

    आपके प्रश्न और उसके उत्तर, दोनो ही समुचित हैं दुनिया के सन्दर्भ में। आपकी पहली कविता में यह सुलझन है। ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। शुभकामनायें।

    Reply
  3. indu puri   August 3, 2010 at 3:04 pm

    प्यारी राजुल
    प्यार
    और ब्लोग की दुनिया में तुम्हारा स्वागत.
    किसने कहा दुनिया बुरी है? यहाँ अच्छे लोगों और अच्छाइयों की भी कोई कमी नही बेटा.
    दुनिया और इसमें रहने वालों से इतनी शिकायते ! इतनी छोटी-सी उम्र में? ये दुनिया बहुत खूबसूरत है.यहाँ कदम कदम पर तुम्हे प्यार,दोस्ती,अपनापन,रिश्तों की खूब सुरती भी मिलेगी.ये तो हम पर डिपेंड करता है कि हम क्या चुनते हैं? गंदगी कहाँ नही होती? ये गंदगी ना होती तो पाकीजगी की कद्र कौन करता? बदसूरती के कारण ही तो ख़ूबसूरती ने अपना वजूद बनाये रखा है. है ना?
    जीवन का जोश,उमंग,उल्लास के साथ स्वागत करो.
    इसके काले पक्ष को नजर में रखो ये तुम्हे 'गम' नही होने देंगे पर इन्हें जीवन पर हावी ना होने दो ना खुद पर ना व्यक्तिगत जीवन पर.
    उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभ कामनाएं और…….
    बी पोजिटिव .

    Reply
  4. Ratan Singh Shekhawat   August 3, 2010 at 3:21 pm

    प्रिय राजुल
    अपने मन के भावों को अभिव्यक्त करने का अंदाज बढ़िया लगा , आज पहली बार पता चला कि मेरी छुटकी इतनी गहराई से सोचती है |
    पर बेटा इंदु पूरी जी की सीख हमेशा याद रखना |

    Reply
  5. ताऊ रामपुरिया   August 3, 2010 at 4:06 pm

    जीना नहीं है किसी को यहाँ ….
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां जीने की आस लगाती है

    जीवन की असलियत को बयान करती कविता है? आज तक जो अनसुलझे यक्ष प्रश्न है उन्हीं को उकेरा गया है.

    परंतु निसंदेह जब तक आस है तब तक दुनियां है. आस गयी कि फ़िर क्या है? जिंदा मुर्दा सब बराबर….यही सूफ़ीज्म की पराकाष्ठा है.

    बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम

    Reply
  6. Pagdandi   August 3, 2010 at 5:22 pm

    pahale to ……we lov u lot rajul………..dusri bat i lov u rajul ……….tisri bat lov u so much ……..aaj papa bhut khush hai na ? kyu nahi honge aakhir unki pyari gudiya badi jo ho gai h……..aur ha bs wahi dohrana chahugi jo indu puri ji ne kaha h bas…….isase jyada m kuch nahi kah sakti ……….kyu ki m bhi itni badi nahi hu abhi ……….bas ak bar aur we lou uuuuuuuuuu lot……….keep smile allwayes….lov u

    Reply
  7. राज भाटिय़ा   August 3, 2010 at 5:45 pm

    बहुत सुंदर कविता, आप कविता तो लिखती होगी लेकिन ब्लांग जगत मै यह पहली कविता होगी, धन्यवाद

    Reply
  8. Uncle   August 4, 2010 at 12:46 am

    Nice

    Reply
  9. अन्तर सोहिल   August 4, 2010 at 5:53 am

    हर चहरे के पीछे छुपा है एक चेहरा यहाँ …..
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां भोली बनना चाहती है …
    कोई किसी का नहीं है अपना यहाँ ….
    पर फिर भी क्यूँ यह दुनियां अपना बनाना चाहती है

    बहुत सुन्दर पंक्तियां
    आपकी कविता बहुत पसन्द आई

    प्रणाम स्वीकार करें

    Reply
  10. Rajul shekhawat   August 4, 2010 at 8:51 am

    indu puri ji mai aapki baat se bilkul sahmat hun..or hamesha yaad rakhungi…..
    lekin meri kavita abhi poori nahi hui….jald hi iske aage ki rachna post ki jayegi….
    aap sab logo ka aabhar….
    dhanyawaad….!!

    Reply
  11. वन्दना   August 4, 2010 at 9:13 am

    सबसे पहले तो ब्लोगजगत मे स्वागत है आपका।
    कविता ज़िन्दगी कि पहेली सुलझाने की कोशिश कर रही है और वो ही हम सभी कर रहे होते हैं मगर ज़िन्दगी एक अबूझ पहेली है जितना सुलझाओ उतनी हि उलझती जाती है।

    Reply
  12. शिवम् मिश्रा   August 4, 2010 at 9:17 am

    एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

    Reply
  13. Mahavir   August 4, 2010 at 1:15 pm

    mujhe bahut achi lagi beta bdhai ho meri taraf se

    Reply
  14. अजय कुमार झा   August 4, 2010 at 2:24 pm

    स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में , पहली पोस्ट , और पहली कविता (ब्लॉग पर ) के लिए भी बधाई । भावाव्यक्ति प्रभावी है । लिखते रहें , शुभकामनाएं

    Reply
  15. Mrs. Asha Joglekar   August 5, 2010 at 3:53 am

    Sunder bhaw aur sunder kawita. Aage aur nikhregi.

    Reply
  16. नरेश सिह राठौड़   August 6, 2010 at 8:43 am

    आपने अपने वजन से कई गुना भारी सवाल कर दिए है | मै अपनी बारह वर्षीय बच्ची के सवालों का जवाब नहीं ढूंढ पाया तो आप तो उससे काफी बड़ी है | पहली पोस्ट का स्वागत है | निरंतर लिखे और लिखते रहे यही कामना है |शुभ आशीष |

    Reply
  17. praveen singh bohra   August 12, 2010 at 4:38 pm

    ye link aap ke liye faydemand ho sakta hai
    http://blogowners9.blogspot.com/

    Reply
  18. संजय भास्कर   August 19, 2010 at 1:41 am

    ब्लोग की दुनिया में तुम्हारा स्वागत.

    Reply
  19. संजय भास्कर   August 22, 2010 at 1:41 am

    जीवन की असलियत को बयान करती कविता है? आज तक जो अनसुलझे यक्ष प्रश्न है उन्हीं को उकेरा गया है.

    Read more: https://www.gyandarpan.com/2010/08/blog-post.html#ixzz0xIDu24Em

    Reply
  20. SULTAN RATHORE " JASRASAR"   July 11, 2012 at 6:58 am

    राजुल बाईसा पहली ही पारी में सतक सा………
    बहुत गहरी बात…अपनी कलम से……..
    बधाई और भी लिखे सा…….

    Reply
  21. Dheeraj Rathore   September 13, 2012 at 7:38 am

    आपकी कविता बहुत पसन्द आई…….
    शुभकामनाएं

    Reply
  22. Dheeraj Rathore   September 13, 2012 at 7:40 am

    आपकी कविता बहुत पसन्द आई ……..
    शुभकामनाएं

    Reply

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