क्या राजपूत समाज विद्याधरनगर विधानसभा सीट की दावेदारी बचा पायेगा ?

विद्याधरनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस-भाजपा दोनों राजपूत प्रत्याशी उतारती आई है| पिछले दो चुनावों में भाजपा से नरपतसिंह राजवी व कांग्रेस से विक्रमसिंह शेखावत आमने सामने रहे| चूँकि राजपूत भाजपा समर्थक हैं और जागीरदारी उन्मूलन के नाम पर आम राजपूत की कृषि भूमि छीनकर अपने समर्थकों को देने के कारण कांग्रेस से नफरत करता है| यही कारण है कि पिछले दोनों ही चुनावों में समाज ने विक्रमसिंह शेखावत का साथ नहीं दिया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा| लेकिन कांग्रेस से चुनाव लड़ने को लेकर अच्छे व्यवहार रखने वाले व हर समय उपलब्ध रहने वाले विक्रमसिंह से समाज को कोई नाराजगी भी नहीं रही| समाज का एक हिस्सा उन्हें समर्थन भी देता आया है|

लेकिन इस बार कांग्रेस ने विक्रमसिंह का टिकट काट कर एक पूंजीपति बनिए को दे दिया| अपनी टिकट काटने से नाराज विक्रमसिंह कांग्रेस से बागी हो गए और निर्दलीय के रूप में चुनाव में मैदान में उतर गए| उनके इस निर्णय से जहाँ कांग्रेस ने राहत की सांस ली, वहीं राजपूत सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ गई| उनकी चिंता का कारण है राजपूत मतों का विभाजन होने से नरपतसिंह राजवी हार सकते हैं और उनकी हार के बाद अगले चुनाव में भाजपा भी इस सीट से राजपूत प्रत्याशी की जगह अन्य जाति का प्रत्याशी उतार देगी| इस तरह कांग्रेस के बाद भाजपा से भी इस सीट पर दावा हमेशा हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगा|

आपको बता दें पिछले दोनों चुनावों में सामाजिक संगठनों ने इस सीट पर किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया ताकि समाज बंधू अपने संपर्कों, व्यवहार आदि के आधार पर दोनों में से किसी एक चुन सकें, क्योंकि सामाजिक संगठनों की नजर में दोनों एक समान है| लेकिन इस चुनाव में नरपतसिंह राजवी के अकेले मैदान में होने व विक्रमसिंह द्वारा निर्दलीय लड़ने को लेकर समाज नरपतसिंह राजवी की जीत को लेकर आशंकित है और यही कारण है कि समाज का अग्रिम संगठन क्षत्रिय युवक संघ सहित विभिन्न संगठनों व समाज के प्रमुख गणमान्य व प्रभावी व्यक्तियों ने विक्रमसिंह को चुनाव मैदान से हटने के लिए समझाया| लेकिन विक्रमसिंह ने किसी की नहीं मानी और चुनाव मैदान में डटे हैं|

अब देखना यह है कि क्या राजपूत नरपतसिंह राजवी के पक्ष में लामबंद होकर इस सीट की भविष्य की दावेदारी बचा पायेंगे या फिर एक व्यक्ति की जिद के आगे इस सीट की दावेदारी हमेशा के लिए खो देंगे|

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