क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब समझते हैं ?

क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब समझते हैं ?

आजकल ज्यादातर लोग सरनेम से जाने जाते हैं या पुकारे जाते हैं| अब भारतीय संस्कृति के अनुसार के किसी के नाम के आगे “जी” ना लगाया जाए तो उसे असभ्यता भी माना जाता है| अत: लोग अपने सहकर्मियों, मित्रों, रिश्तेदारों के नाम के आगे जी लगाकर संबोधन करते हैं| जैसे राठौड़ को राठौड़ जी, शेखावत को शेखावत जी, अरोड़ा को अरोड़ा जी, खत्री को खत्री जी, मेहरा को मेहरा जी आदि आदि| लेकिन क्या आप जानते है राजपूत संस्कृति में सरनेम के आगे “जी” लगाने का मतलब क्या है ?

जी हाँ ! राजपूत संस्कृति में महिला के सरनेम के आगे ही जी लगाने की परम्परा रही है| यानी आप राठौड़ जी कहकर संबोधित करते हैं तो राजपूत संस्कृति समझने वाला व्यक्ति जिसे आप संबोधित कर रहे हैं उसे महिला ही समझेगा| अभी 19 फरवरी को शेरसिंह राणा क्षत्रिय चिन्तक देवीसिंह जी महार के पास बैठे फोन पर वार्ता करते हुए किसी को निर्देश दे रहे थे कि राठौड़ जी को यह बता देना| इस पर देवीसिंह जी ने पूछ लिया कि कौन राठौड़ जी ? शेरसिंह राणा ने बताया कि किसी कार्यालय में एक राठौड़ साहब हैं| इस पर देवीसिंह जी ने बताया कि आपके मुंह से राठौड़ जी शब्द सुनकर मैं तो समझा था कि आप किसी राठौड़ महिला के बारे में बात कर रहे हैं|

इस चर्चा के बाद आदरणीय देवीसिंह जी ने उपस्थिति सभी बन्धुओं को बताया कि राजपूत संस्कृति में सरनेम के आगे जी का संबोधन सिर्फ महिलाओं के लिए ही किया जाता है| उन्होंने आगे बताया कि राजपूत पुरुष के नाम से पहले सरनेम प्रयोग किया जाता था पर आज कथित आधुनिक शिक्षित लोग जिन्हें अपनी संस्कृति का ज्ञान नहीं वे नाम के बाद में सरनेम लगाने लगे हैं जो गलत हैं|

आपको बता दें राजपूत महिलाएं ससुराल में अपने मायके के सरनेम से ही पहचानी जाती है और उन्हें जी लगाकर उनके सरनेम से संबोधित करने की परम्परा आज भी कायम है| जैसे राठौड़ घराने से आई महिला को राठौड़ जी, शेखावत घराने से आई बहु को शेखावत जी, सोलंकी, पंवार, पुण्डीर, हाड़ा, चौहान घराने से आई बहुओं को सोलंकी जी, पंवार जी, पुण्डीर जी, हाड़ी जी, चौहान जी आदि कहकर ही संबोधित किया जाता है| अत: यदि आपका कोई मित्र राजपूत है तो कृपया उन्हें सरनेम के आगे जी लगाकर संबोधित करने के बजाय उनके नाम के आगे ही जी लगाकर संबोधित करें और खासकर राजपूत युवा सदियों से चली आ रही परम्परा का निर्वाह अवश्य करें|

2 Responses to "क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब समझते हैं ?"

  1. Sanjay Mundhra   February 28, 2019 at 10:36 pm

    Aap ke hisab se aap ke liye Ratan Singh ji Sahi hai Shekhawat ji galat hai?

    Reply
    • Ratan Singh Shekhawat   March 2, 2019 at 8:44 am

      Yes

      Reply

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