क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब जानते है    

भारतीय संस्कृति में किसी भी उसके नाम के बाद “जी” लगाकर संबोधित करने की परम्परा है, पर क्या आप जानते हैं कि राजपूत सरनेम के बाद जी लगाने का क्या अर्थ  निकलता है | इस लेख में हम राजपूत समाज की एक ऐसी परम्परा की चर्चा करेंगे जिसमें सरनेम के आगे “जी” लगाते ही संबोधन महिलावाचक बन जाता है | यह परम्परा सिर्फ राजपूत जाति में है, पर अफ़सोस वर्तमान राजपूत पीढ़ी   इस परम्परा को जानती तक नहीं | मैं खुद इस परम्परा को आज से वर्ष भर पहले तकनहीं जानता था, पर आदरणीय देवीसिंह जी महार सिस परम्परा का ज्ञान हुआ |

राजपूत समाज में महिलाओं को उनके मायके के सरनेम से पुकारे जाने की परम्परा रही है जैसे राठौड़ घराने से आई राजपूत वधु को उसके ससुराल में राठौड़ जी, चौहान घराने से आई महिला को चौहान जी जैसे संबोधन किये जाते हैं | अत: जब भी किसी परिवार में  राठौड़ जी, चौहान जी, शेखावत जी, सिसोदिया जी आदि शब्द सुनते हैं तो यही समझा जाता है कि किसी महिला की चर्चा चल रही है | पुरुषों के लिए आदर सूचक जी शब्द सिर्फ नाम के आगे लगाया जाता है |

इस प्रकार राजपूत जाति में महिला के सरनेम के आगे जी शब्द लगाने की परम्परा रही है और ऐसा संबोधन सुनते ही उसे महिलावाचक समझ लिया जाता है |

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