कुचामन फोर्ट का प्रवेश द्वार पंच पोळ

ऊँची पहाड़ी पर बने कुचामन किले में बैक गियर में चलती जीप ने हमें किले के मुख्य द्वार पर छोड़ा | द्वार के बाहर एक तरफ पहाड़ीनुमा दीवार पर गणेश जी का छोटा सा मंदिर बना है, पर्यटक इसी मंदिर में गणेश जी को प्रणाम कर किले के मुख्य द्वार से किले में प्रवेश करता है | इसी मुख्य द्वार को पंचपोळ कहा जाता है | आपको बता दें राजस्थान में दरवाजे को पोळ कहा जाता है | किले के मुख्य दरवाजे में पांच दरवाजे यानी पोळ बनी है | इसीलिए इस पोळ का नाम पंचपोळ पड़ा |

देखने में यह दरवाजा आपको साधारण प्रवेश द्वार नजर आयेगा और दरवाजे में घुसते ही आपको महल में होने का अहसास होगा, पर यह दरवाजा और इसका शिल्प युद्ध रणीनीति का बहुत बड़ा हिस्सा है | दरवाजे में ऊपर नीचे बड़े सुन्दर बरामदे व कक्ष बने है जिनकी उपस्थिति पर्यटक को महल में होने का आभास कराते हैं | दरवाजे में बने इन बरामदों व कमरों के अन्दर बाहर सुन्दर चित्रकारी की हुई है यही चित्रकारी सुरक्षाकर्मियों के लिए बने इस निर्माण को महल सरीखा महसूस कराती है |

किले के प्रांगण तक पहुँचने के लिए पंचपोळ में बने घुमावदार रास्ते के चार घुमाव पार करने पड़ते है | ये घुमाव किले की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है | इन घुमावों के कारण दुश्मन सीधा किले में प्रवेश नहीं कर सकता है, प्रवेश के लिए अपने घोड़ों व सैनिकों को चार घुमावों में मोड़ने से उनकी गति धीमी हो जाती थी और हर मोड़ पर किले के सैनिक दुश्मनों पर आक्रमण कर उन्हें  रोक दिया करते थे | इस तरह यह दरवाजा जिसे पञ्चपोळ कहा जाता है किले की सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता था क्योंकि किले पर आक्रमण की स्थिति में दुश्मन से सबसे पहले इसी दरवाजे से पाला पड़ता था |

सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण होने के साथ ही सुरक्षाकर्मियों के लिए यहाँ बने कक्ष देखकर सुखद अहसास होता है कि किले की सुरक्षा में लगे सैनिकों के लिए इस किले में शानदार सुविधा थी | इस महल सरीखी ईमारत में रहने वाले सैनिक अपने आपको अवश्य गौरवशाली समझते रहे होंगे और उनका मनोबल भी काफी ऊँचा रहा होगा |

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