कुछ किस्से गांव के भोले भाले ताऊओं के

ताऊ लोग हर क्षेत्र में मिलेंगे कुछ ताऊ तेज तर्रार होते है कुछ बड़े भोले भाले | गांवों में अक्सर ऐसे भोले भाले ताऊ अपनी हरकतों व कार्यकलापों से गांव वासियों की ठिठोली व मजाक के पात्र बनते रहते है और इस हंसी ठिठोली का खुद भी गांव वालों के साथ भरपूर लुफ्त उठाते है | पेश है ऐसे ही कुछ ताऊओं के कुछ असली किस्से |
सारी कमाई तो मै कर ल्याया अब आसाम में क्या रखा है : ताऊ
मेरे पडोसी गांव राजपुरा के कुछ लड़के बस पकड़ने के लिए गांव से ३ की. मी. दूर मुख्य सड़क पर बने बस स्टैंड की और आ रहे थे उनमे से कुछ को रोजगार के लिए आसाम जाना था तो कुछ उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए साथ आ रहे थे | रास्ते में उन्हें उनके ही गांव का एक ताऊ मिला जो आसाम में नौकरी से छुट्टी लेकर वापस गांव जा रहा था | लड़कों के पास आने और यथा अभिवादन करने के बाद ताऊ ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पूछा :-
ताऊ :- अरे ! आज ये सामान उठाकर कहाँ जा रहे हो बच्चो |
एक लड़का :- ताऊ श्री ! हम कमाई करने के लिए आसाम जा रहे है |
ताऊ :- अरे बावली बूचो ! अब आसाम में क्या रखा है ? वहां तो जितनी कमाई थी वो सारी तुम्हारा ये ताऊ कर लाया |
( राजपुरा के ये ताऊ बहुत भोले इंसान थे आसाम से जो कुछ कमा कर लाये उसके बारे में समझ रहे थे कि आसाम में तो बस इतना ही था जो वह ले आये | इन ताऊ जी के कई असली किस्से उसी गांव के पदम सिंह जी जो कालेज में हमारे वरिष्ठ थे अक्सर सुनाते रहते थे | उन्ही किस्सों में एक था ऊपर लिखे किस्से ) उन्ही ताऊ का एक और असली किस्सा
उसने एक तोडा मै दो तोडूंगा
ताऊ कुँए से पानी के दो मटके कंधो पर रखकर घर ला रहे थे , रास्ते में किसी का एक टुटा मटका पड़ा था जिसे देख ताऊ रुके और पास खड़े लोगो से पूछा – ये रास्ते में मटका किसने तोड़ दिया | वहां खड़े लोगों में से एक ने ताऊ को बताया कि यह मटका तो आप ही के परिवार की एक दरोगी (दासी ) से टूट गया |
यह सुनते हुए ताऊ ने आव देखा न ताव और अपने कन्धों पर रखे दोनों मटके गिराकर तोड़ दिए और बोले :- दरोगी एक मटका तोड़ सकती है मै दो क्यों नहीं ?
अल्ला वल्ला कुछ नहीं करेगा माई अब तो ऊपर वाले को याद कर
घटना लगभग पच्चीस साल पुरानी है ताऊ जय किशन जी हमारे गांव में डाकिया का काम करते थे गर्मियों का मौसम था अतः गांव की डाक बड़े पोस्ट ऑफिस खूड में जमा कराने के लिए जाने हेतु आज डाकिया ताऊ पैदल न जाकर बस स्टैंड पर बस का इन्तजार कर रहे थे कि बस स्टैंड से कुछ ही दूर अचानक एक जोंगा गाड़ी सड़क से नीचे उतर एक बड़े खेजडी के पेड़ से जा टकराई | टक्कर इतनी जोरदार थी कि टक्कर के बाद पेड़ के सभी डाल टूट कर जोंगा गाड़ी के ऊपर गिर गए | यह दुर्घटना देख बस स्टैंड पर डाकिया ताऊ जय किशन जी के साथ बैठे सभी लोग मदद के लिए दौड़ पड़े और घायलों को गाड़ी के अन्दर से निकलने लगे जिनमे अधिकतर की मृत्यु हो चुकी थी कुछ की हालत गंभीर थी सभी लोग हमारे पास के एक कस्बे के एक मुस्लिम परिवार के लोग थे | उनके साथ एक बुजुर्ग महिला भी जिसे दुर्घटना में कोई चोट नहीं आई लेकिन अपने बेटों पोतों को घायल देख बुढिया ने छाती पीट-पीट कर अल्लाह अल्लाह कहते हुए विलाप करना शुरू दिया जो स्वाभाविक भी था , अन्य सभी लोग घायलों की मदद में लगे थे और किसी ने ताऊ जय किशन जी को बुढिया को सांत्वना देकर समझाने को कहा | बुढिया का विलाप सुन ताऊ जय किशन जी उसे सांत्वना के साथ शांत करने की कोशिश करते हुए समझाने के उद्देश्य से कहने लगे –
ताऊ जय किशन जी :- अरे माई ! जो होना था सो हो गया अब रोने पीटने से क्या होगा और अब अल्लाह वल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा बस तू तो ऊपर वाले को याद कर वही सब ठीक कर देगा |

अब ताऊ जय किशन जी तो ठहरे ताऊ उन्होंने यह तो सोचा ही नहीं कि बेचारी बुढिया तो अल्लाह के रूप में ऊपर वाले को ही याद कर रही है |
आज ताऊ जय किशन जी बूढे हो चुके है पर अक्सर चौपाल पर उनके आते ही कभी न कभी कोई न कोई ताऊ के साथ ठिठोली करने के लिए इस घटना की चर्चा छेड़ देते है और ताऊ खुद भी इस ठिठोली का भरपूर मजा लेते है कभी नाराज नहीं होते |

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