कांम ई रांम है = काम ही राम है

कांम ई रांम है = काम ही राम है

केवल चार शब्दों की नन्ही मुन्ही कहावत में प्रागैतिहासिक युग से भी बहुत पहले की झांकी मिल जाती है कि किसी ईश्वरीय चमत्कार से मनुष्य-मनुष्य नहीं बना ,बल्कि वह मेहनत और काम का ही करिश्मा है कि उसने मनुष्य के अगले दो पांवों को हाथों में तब्दील कर दिया ,अन्यथा वह अब तक चौपाया का ही जीवन जीता | पांवों का स्थान छोड़कर हाथ स्वतंत्र हुए तो पत्थर फैंकना ,लकडी थामना और पत्थरों के औजार व हथियार बनाने में मनुष्य कामयाब हो गया | उसकी कमर सीधी होते ही वह सीना तान कर आकाश कि और सिर उठाये सीधा स्तर खडा हो गया तो प्रकृति ने भी उसके अदम्य पौरुष में माँ कि तरह हाथ बंटाना शुरू कर दिया |

और जब मेहनत या काम ने वाणी का अविष्कार किया तो उसकी कल्पना में अनेक देवताओं का अवतरण हुआ – इन्द्र ,वरुण ,सूर्य आदि आदि | मनुष्य की मेहनत ही वह आद्यशक्ति है , जिस से ब्रह्म और ब्रह्मांड का रहस्य उद्घाटित हुआ |
विजयदान देथा द्वारा लिखित

5 Responses to "कांम ई रांम है = काम ही राम है"

  1. राज भाटिय़ा   September 18, 2009 at 8:33 pm

    बहुत अच्छी बात कही आप ने धन्यवाद

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  2. ताऊ रामपुरिया   September 19, 2009 at 3:56 am

    बहुत छोटी सी बात और छोटी सी पोस्ट है पर सीख एवरेस्ट पर्वत जितनी बडी है. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  3. Nirmla Kapila   September 19, 2009 at 4:04 am

    चंद शब्दों मे जीवन का सार बता दिया बहुत बहुत धन्यवाद्

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  4. काजल कुमार Kajal Kumar   September 19, 2009 at 4:50 pm

    विजयदान देथा की कहानी पर बनी फिल्म "पहेली" मेरी पसंदीदा फिल्म है

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  5. नरेश सिह राठौङ   October 1, 2009 at 1:54 am

    बहुत सुन्दर बात कही है आभार ।

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