कांग्रेसी, कामरेड तंग करते है, बीजेपी अनाज नही होने देती

कांग्रेसी, कामरेड तंग करते है, बीजेपी अनाज नही होने देती

कांग्रेसी पुरे चौमासे तंग करते है कामरेड हमेशा परेशान करतें है और बीजेपी खेतों में अनाज पैदा नही होने देती | ये सब पढ़कर शायद आप चौंक रहे होंगे लेकिन ये सच है अभी दो दिन पहले राजस्थान के सीकर जिले स्थित अपने गांव के प्रवास के दौरान गुवाड़ (चौपाल) में किसानों द्वारा की जा रही चर्चा में एक किसान बोल रहा था कि रात को मेरे खेत में कोमरेडों ने फसल का काफी नुकशान कर दिया और उनको भगाने के चक्कर में रात को पुरी नींद सो नही पाया | ये बात सुनकर मै भी असमंजस में पड़ गया कि कामरेडों का फसल से क्या मतलब | पूछने पर एक किसान ने बड़े विनोदपूर्ण ढंग से बताया कि कांग्रेसी बरसात के दिनों में तंग करते है,कामरेड हमेशा तंग करते है और बीजेपी खेतों में फसल नही होने देती चौथी पार्टी यहाँ है नही | और उसके बाद इस सम्बन्ध में मुझे विस्तार से मिली जानकारी निम्न है –

1- कांग्रेसी :- बरसात में पैदा होने वाले एक कीडे को यहाँ के लोग कांग्रेसी कहते है यह शरीर पर जहाँ भी चल फ़िर जाता है वहां-वहां शरीर पर फोडे निकल जाते है यह कीड़ा पुरे बरसात के मौसम में लोगों को परेशान करता है |

2- कामरेड :- अमरीकन और जर्सी गायों के बछडे खेती बाड़ी के कामो में किसी तरह काम नही आते है अतः न तो उनका कोई उपयोग है और न ही वे बिकते है सो पशुपालक इन्हे बेकार समझ छोड़ देते है ऐसे छोड हुए बछडे आवारा होकर झुंड के झुंड खेतों में फसल को नुकसान पहुचाते है जिससे किसान बड़े परेशान रहते है उन्हें रात भर जागकर इन आवारा बछडों से अपनी फसल बचाने को खेतो की रखवाली करनी पड़ती है और ये बछडे भी इतने ढीठ होते है कि जब तक ताऊ ब्रांड लट्ठ की दो चार इन्हे नही पड़े ये भागते तक नही | चूँकि हमारे विधानसभा क्षेत्र में पिछले लगभग बीस सालों से कोमरेड विधायक जीतता आ रहा है लाख जतन करने के बावजूद दूसरी पार्टिया उसे हरा नही पाती| अब बाकि पार्टियों के लिए तो ये विधायक ऐसा ढीठ है कि उनसे कभी हारता ही नहीं| और हाँ ज्यादातर बेरोजगार आवारा युवक उसके कार्यकर्त्ता है जो इन्ही बछडों की तरह आवारा और ढीठ है अतः इनकी कुछ प्रकृति आपस समान होने के कारण किसानों ने इन बछडों का नामकरण कामरेड कर रखा है और आम बोलचाल में किसान इन आवारा बछडों को कोमरेड कह कर ही संबोधित करते है |

3- बीजेपी घास :- अटल जी प्रधान मंत्री बनने से पहले और राममंदिर मुद्दे के बाद जिस तरह से बीजेपी तेजी से उभरी लगभग उसी समय और उसी तेजी से गेहूँ के बीज के साथ एक पीले फूलों वाली घास खरपतवार बनकर सारे खेतों में फ़ैल गई जब तक किसान इस आर्जीमोन श्रेणी की पीले फूलों वाली घास के बारे में कुछ जान पाता ये पुरे खेतों में इस तरह फ़ैल गई जैसे फसल बो रखी हो | बीजेपी और इस घास के फैलाव की समानता और इसके पीले फूलों की वजह से किसानो ने इस घास का नाम बीजेपी रख दिया और अब क्षेत्र का आम आदमी इसे बीजेपी घास के नाम से ही जनता है यह घास फसलों पर विपरीत असर डालती है जिस खेत में इसकी अधिकता है वहां अनाज के पौधे सही ढंग से पनप नही सकते | हालाँकि जागरूक और मेहनत-कश किसानो ने तो इस घास को उसी तरह उखाड़ फैंका जिस तरह राजस्थान की वसुंधरा सरकार को इन चुनाओ में | लेकिन आलसी किसानों के खेतों में यह घास अब भी बहुतायत से मौजूद है और हवा के साथ अपने बीजों का प्रसार करने में लगी है |

  
         कोमरेड                      बीजेपी घास                कोमरेड

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