कर्नाटक प्रकरण, कांग्रेस ने जो बोया उसी की फसल काट रही है

कर्नाटक प्रकरण, कांग्रेस ने जो बोया उसी की फसल काट रही है

1947 में सत्ता हस्तांतरण के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने लोकतंत्र की शुरुआत ही उसका गला घोंटने के साथ की थी| देश में जब आम चुनाव हुए और देशी रियासतों के राजा-महाराजा चुनावों में खड़े हुए, तो उन्हें जनता का खूब समर्थन मिला| इससे नेहरु को भविष्य में कांग्रेस के हाथों सत्ता खिसकती नजर आई| तब नेहरु ने राजाओं को चुनावों से दूर रहने के लिए उन्हें चेतावनी दी कि जो राजा चुनाव लड़ेंगे, उनका प्रिवीपर्स बंद कर दिया जायेगा| इस तरह नेहरु ने पूर्व राजाओं को चुनावों से दूर रखने का कुचक्र चलते हुए देश में लोकतंत्र की स्थापना के समय ही कुठाराघात कर दिया| यही नहीं राजस्थान में राजाओं-जागीरदारों को समर्थन देने वाले आम राजपूत की कृषि भूमि तक छीनकर लोगों में बाँट दी व बदले में अपना वोट बैंक बनाया|

उसके बाद भी कांग्रेस ने ऐसा कोई चुनाव नहीं छोड़ा, जिसमें लोकतंत्र का मजाक ना उड़ाया हो| जिन राज्यों में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला, उन राज्यों में खरीद फरोक्त की राजनीति के जरिये बहुमत प्राप्त दल को ठेंगा दिखाते हुए कांग्रेस ने सरकारें बनाई| इस तरह के कई उदाहरण इतिहास में भरे पड़े हैं जब कांग्रेस समर्थित राज्यपालों के सहयोग से कांग्रेस ने बिना बहुमत मिले सत्ता हथियायी है|

आज कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के साथ वही खेल लिया, जो सदियों से कांग्रेस अपने विरोधियों के साथ खेलती आई है| जो बिना बहुमत सत्ता हथियाने के हथकण्डे कांग्रेस ने ईजाद किये थे आज भाजपा ने उसी तरह लागू कर दिए| कर्णाटक में आज कांग्रेस को लोकतंत्र की हत्या नजर आ रही है, पर उसने जो लोकतंत्र की हत्याएं की थी, उस पर वह कभी आत्म-मंथन नहीं करती| मतलब कांग्रेसी उसी को सही मानते है जो उनके मनमाफिक हो|

आज जब कांग्रेस कर्नाटक में बिलबिला रही है तब किसी को उससे सहानुभूति नहीं है, बल्कि लोग चटखारे लेकर कांग्रेस के मजे ले रहे है|  कुल मिलाकर कांग्रेस ने जो काँटों के बीज बोये आज उसी की फसल काट रही है और अपने ही बोये कांटे चुभने से बिलबिला रही है|

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