Home Freedom Fighter कमाल कर दिया था शेखावाटी के इस मीणा क्रांतिवीर ने

कमाल कर दिया था शेखावाटी के इस मीणा क्रांतिवीर ने

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शेखावाटी में क्रान्ति

शेखावाटी ब्रिगेड के झुंझुनू स्थित मुख्यालय पर क्रांतिवीर दुल्हेसिंह शेखावत का कटा शीश लटका रहा था, तो दूसरी और क्रांतिकारी दुल्हेसिंह शेखावत के गांव गुडा में क्रांतिवीर का सिर लाने और मेजर फोरेस्टर का घमण्ड चूर करने के लिए कई क्रांतिवीर बड़े से बड़े बलिदान देने की तैयारी कर रहे थे| आपको बता दें राजस्थान में 1818 ई. में राजाओं द्वारा अंग्रेजों के साथ संधियाँ करना शेखावाटी के कई सामंतों को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपने सीमित साधनों के बल पर ही सही पर अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू कर दिया था| उनके असंतोष को दबाने के लिए अंग्रेजों ने मेजर फोरेस्टर के नेतृत्व में शेखावाटी ब्रिगेड की स्थापना की, जिसका मुख्यालय झुंझुनू में बनाया गया|

मेजर फोरेस्टर ने शेखावाटी के क्रांतिकारी सामंतों के खिलाफ अभियान चलाया और इस अभियान के तहत शेखावाटी के सीमावर्ती कई किले व गढ़ तोड़ डाले| अंग्रेजों की इस ब्रिगेड से अक्सर क्रांतिकारियों की भिडंत हो जाया करती थी| ऐसी एक भिडंत में गुडा गांव के क्रांतिकारी दुल्हेसिंह शेखावत अंग्रेजी सेना की शेखावाटी ब्रिगेड से लड़ते हुए मातृभूमि के लिए शहीद हो गए| मेजर फोरेस्टर ने अन्य क्रांतिकारियों का मनोबल तोड़ने व उन्हें भयभीत करने के उद्देश्य से क्रांतिकारी दुल्हेसिंह शेखावत का सिर काटकर शेखावाटी ब्रिगेड के मुख्यालय पर लटका दिया था| जो क्रांतिकारियों को बुरा लगना स्वाभाविक था|

मेजर फोरेस्टर के इस कुकृत्य ने क्रांतिकारियों के दिलों में लड़ने की आग भड़का दी और एक साहसी मीणा क्रांतिकारी ने रात्री समय अकेले ही प्रवेश किया और क्रांतिकारी दुल्हेसिंह शेखावत का सिर उतार लाया| उस साहसी मीणा के साहस के आगे अंग्रेजी सेना कुछ नहीं कर पाई| ज्ञात हो अपने सामंत शासकों के आव्हान पर शेखावाटी के किसानों ने शेखावाटी ब्रिगेड के ऊंट व घोड़ों के लिए चारा तक देना बंद कर दिया था, जिससे अंग्रेज अधिकारी बौखला गए और उन्होंने शेखावाटी के सामंतों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था|

शेखावाटी के स्वतंत्रता इतिहास में उक्त घटना की संक्षिप्त जानकारी तो मिलती है पर अफ़सोस ! उस साहसी क्रांतिकारी मीणा जाति के व्यक्ति का नाम नहीं मिलता| हो सकता है उक्त साहसी मीणा भी गुडा गांव का ही हो और उसी गांव के जागरूक युवाओं का कर्तव्य बनता है कि बड़े बुजुर्गों से इस घटना की चर्चा कर उक्त साहसी मीणा का नाम सामने लाये| गुडा गांव के बड़े बुजुर्गों को उक्त घटना व साहसी मीणा के बारे में जरुर जानकारी होगी|

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