39.5 C
Rajasthan
Friday, May 27, 2022

Buy now

spot_img

कट्टर भाजपाई क्यों बन रहे है भाजपा विरोधी ?

वर्षों से कट्टर भाजपाई कार्यकर्त्ता रहे आज भाजपा के विरोध में है ऐसा क्यों ? वे क्या कारण है कि जन्मजात भाजपा से जुड़ा एक बहुत बड़ा वर्ग आज भाजपा के खिलाफ खड़ा है| मैं खुद बचपन से संघ-भाजपा का कार्यकर्त्ता रहा हूँ, पर आज भाजपा की कार्यप्रणाली से नाराज हूँ और उसे अभिव्यक्त करते ही भाजपाइयों द्वारा कांग्रेसी, राष्ट्रविरोधी, धर्मविरोधी जैसी उपाधियों से तुरंत नवाज दिया जाता हूँ| आज जब भाजपा सत्ता में है, सत्ता का फायदा उठाने का मौका है फिर भी मैं भाजपा के विरोध में हूँ| मैं विरोधी क्यों बना समझने के लिए मेरी संघ-भाजपा के साथ ये कहानी पढ़िए-

कालेज के दिनों में मैं अपने समाज द्वारा संचालित के श्रीकल्याण राजपूत छात्रवास में रहता था| भाजपा से शहर में आने से पहले से ही जुड़ा था, संघ से दसवीं से आगे की पढ़ाई के लिए शहर आने पर जुड़ा| संघ, विद्यार्थी परिषद से जुड़ते ही मुझे भी साथियों सहित देश की कई समस्याओं से रूबरू करवाया गया| जिनमें समान नागरिक संहिता, कश्मीर में धारा 370, राम मंदिर, असम में घुसपैठ आदि आदि| ये समस्याएँ संघी मित्रों द्वारा हमारे सामने इस तरह प्रस्तुत की जाती थी कि मैं व मेरे जैसे कई छात्र उद्वेलित रहने लगे| पढ़ाई में मन नहीं लगता, हर समय इन समस्याओं से चिंतित रहते, इन समस्याओं को उठाने के हर आन्दोलन में सक्रियता से भाग लेने लगे| पढाई दूसरी वरीयता पर चली गई|

असम में घुसपैठ के खिलाफ आन्दोलन में अक्सर हिंसा होती, रात को खबर सुनते ही संघी मित्र सुबह कालेज के द्वार पर असम गण परिषद के समर्थन में हड़ताल का बोर्ड लगा देते, कामरेड उनके बोर्ड फैंक देते, तब राजपूत छात्रावास में सहायता का सन्देश आता और राजपूत छात्रवास के छात्र अपनी पढाई छोड़ संघी मित्रों के पक्ष में कामरेडों से लोहा ले रहे होते, झगड़े भी होते, मुकदमें भी होते, पर मुकदमें कामरेडों व राजपूत छात्रावास के छात्रों पर ही होते, संघी भाजपाई मित्रों पर नहीं, क्योंकि वे लड़ाई भड़काने के बाद खुद झगड़े से दूर ही रहते थे|

पंचायत, विधानसभा, लोकसभा, सहकारी समितियों के चुनाव आते, छात्रावास के सीनियर राजपूत छात्रों को भाजपाई नेता गांवों में जाकर राजपूत जाति का पार्टी के पक्ष में मतदान सुनिश्चित करने को प्रेरित करते| गांवों में दौरे के लिए एक जीप भी भिजवाई जाती| देश की समस्याओं से उद्वेलित हमारा मन सोचता कि भाजपा को मजबूत करो ताकि सत्ता में आते ही उपरोक्त सभी समस्याओं का निदान हो जायेगा जो देशहित के लिए बहुत ही आवश्यक है और हम कालेज की कक्षाएं छोड़ तपती दोपहरी में गांव गांव जाकर अपने स्वजातियों को भाजपा के पक्ष में लामबंद करते| जिस गांव में कांग्रेसी भाजपाई नेताओं को घुसने नहीं देते, वहां भाजपा का झंडा लगी गाड़ी घुसाते कि कौन हमें रोकता है? हालाँकि हमें कभी किसी ने रोकने की हिम्मत तक नहीं की|

इस तरह हम पढाई के दिनों में संघ भाजपाइयों द्वारा इस्तेमाल किये गए| गांव में प्रथम श्रेणी से उतीर्ण होने वाले मेरे जैसे छात्र अब पढाई में पिछड़ गए, मुस्किल से तीसरी श्रेणी या फिर सप्लीमेंट्री परीक्षा देकर जैसे तैसे कालेज पास की| नौकरियों की तैयारी के लिए तो समय ही नहीं निकालने दिया गया| जबकि व्यक्ति निर्माण का दावा करने वाले संघ प्रचारकों को हमें सबसे पहले अपना कैरियर बनाने के लिए मार्गदर्शन देना था, लेकिन उन्होंने हमें हमेशा उक्त समस्याओं से उद्वेलित किया| साथ के ज्यादातर संघी मित्र व्यवसायिक घरानों से थे, वे भी हमें आगे कर, अपनी पढ़ाई का ध्यान रखतें, विरोधी कामरेडों के साथ झगड़ों से दूर रहते| खैर…..फिर भी हम भाजपा के साथ बने रहे| पढाई ढंग से ना कर पाने के बावजूद अपने पुरुषार्थ के बल पर अपना जीविकोपार्जन करते हुए, हर चुनाव में भाजपा को जीताने के लिए सामर्थ्यनुसार सहयोग करते रहे| सोशियल मीडिया के चलन के बाद संघ-भाजपा के पक्ष में कांग्रेसियों, वामपंथियों, छद्म सेकुलर गैंग से भाजपा की आईटी शैल से ज्यादा मुकाबला करते रहे| मोदीजी पर जब इस गैंग के हमले हो रहे थे तब हमने सोशियल मीडिया में बढ़ चढ़कर उक्त गैंग से लोहा लिया|

आज भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है| जिन मुद्दों के लिए हमने कैरियर दांव पर लगा दिया था, पढाई पर ध्यान नहीं दिया था, वो मुद्दे भाजपा छोड़ चुकी है| समान नागरिक संहिता की बात करने वाली भाजपा आरक्षण में प्रमोशन, सुप्रीम कोर्ट व मायावती द्वारा कमजोर किया गया एससी/एसटी एक्ट को मजबूत कर समान नागरिक संहिता की अपनी अवधारणा के खिलाफ काम कर देश में असमानता बढ़ा रही है| जिस राममंदिर के मुद्दे से राजनीति में आगे बढ़ी, उसे सुप्रीमकोर्ट में मामला बताकर दूर कर चुकी है| एससी/एसटी एक्ट मामले पर सुप्रीमकोर्ट का फैसला निष्प्रभावी कर सकती है पर राममंदिर के लिए सुप्रीमकोर्ट का फैसला चाहिए| धारा 370 की तो आज चर्चा ही छोड़ दी गई, हाँ उसके पक्षधरों के साथ सत्ता का स्वाद अवश्य चख लिया| असम में घुसपैठियों को निकालने का मुद्दा सत्ता में आने के चार साल बाद उठाया ताकि अगले चुनाव में उसे भुनाया जा सके|

अब जिन मुद्दों के लिए हमनें अपना कैरियर ख़राब किया, पढाई ख़राब की जब पार्टी ने वे ही छोड़ दिए, अपनी ही भाजपाई नीतियों के खिलाफ कार्य करना शुरू कर दिया तो फिर हम समर्थन किस मुद्दे पर करें| फिर हम इतने अंधे भी नहीं, ना ही हमारे मन में सत्ता का फायदा उठाने का स्वार्थ है, तो विरोध क्यों ना करे ? वैसे भी गलती करने पर अपने ही लोग डांटते है पराये तो गलती देख खुश होते है, क्योंकि गलतियाँ ही पतन का कारण बनती है|

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Stay Connected

0FansLike
3,333FollowersFollow
19,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles