औरत

औरत

दुनिया की जन्मदाता हैं औरत
हजारो वर्ष पुराने इतिहास की गाथा हैं औरत
जिस पर खड़े है हम ,वो धरती माता हैं औरत
अबला कहा जाता हैं ,वही चंडिका हैं औरत
इस जग में दुखिया का नाम है औरत
चारो धामो का धाम है औरत
भारत के हर त्यौहार का नाम है औरत
ममता का सागर है औरत
बदले की आग का आसमाँ है औरत
मोहब्बत का दरिया है औरत
नफरत का सुलगता सरिया है औरत
प्यार का घुमड़ता बादल है औरत
क्षमा सा बरसता पानी है औरत
मगर हमने इसकी कीमत ना जानी
अजीब दास्ताँ है अजब कहानी
फिर भी भगवान की महान रचना है औरत
केसर क्यारी..उषा राठौड़

20 Responses to "औरत"

  1. ehsas   October 21, 2010 at 6:19 pm

    bahut hi sunder chitran kiya hai aapne.

    Reply
  2. विवेक सिंह   October 21, 2010 at 7:24 pm

    औरत की जय हो ।

    Reply
  3. डॉ. मोनिका शर्मा   October 21, 2010 at 8:03 pm

    उषाजी कुछ पंक्तियाँ तो इतनी कमाल लिखी हैं की प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं…..
    हर त्योंहार का नाम है औरत…. और जिस पर हम खड़े हैं वो धरती माता है औरत ….. बहुत खूब

    Reply
  4. Ratan Singh Shekhawat   October 22, 2010 at 12:59 am

    वाह ! बहुत बढ़िया चित्रण किया है आपने !

    Reply
  5. Uncle   October 22, 2010 at 1:08 am

    पिछली बार की तरह आज भी शानदार रचना !

    Reply
  6. क्षत्रिय   October 22, 2010 at 1:27 am

    औरत के चरित्र का चित्रण करती एक बेहतरीन रचना

    Reply
  7. chitrkar   October 22, 2010 at 1:38 am

    वाह ! बहुत बढ़िया !!

    Reply
  8. Udan Tashtari   October 22, 2010 at 2:10 am

    बहुत उम्दा, रतन भाई.

    Reply
  9. प्रवीण पाण्डेय   October 22, 2010 at 2:52 am

    सहमत।

    Reply
  10. arganikbhagyoday   October 22, 2010 at 3:56 am

    सत्य बचन !

    Reply
  11. Mahavir   October 22, 2010 at 4:48 am

    umda rachna hai USHA JI

    Reply
  12. संगीता पुरी   October 22, 2010 at 5:06 am

    बहुत खूब !!

    Reply
  13. उस्ताद जी   October 22, 2010 at 5:54 am

    1.5/10

    अति सामान्य रचना

    Reply
  14. Rajul shekhawat   October 22, 2010 at 7:08 am

    वाह ! बहुत बढ़िया !!

    Reply
  15. P.N. Subramanian   October 22, 2010 at 8:40 am

    औरत एक रूप अनेक. सुन्दर रचना.

    Reply
  16. ताऊ रामपुरिया   October 22, 2010 at 12:07 pm

    बहुत ही खूबसूरत रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    Reply
  17. नरेश सिह राठौड़   October 22, 2010 at 2:16 pm

    नारी ही नारायण है |

    Reply
  18. महिलाओं का सम्मान करना सीखना चाहिये, सभी को..

    Reply
  19. Tany   November 13, 2010 at 7:25 am

    वाह उषाजी हर बार की तरह बहुत खूब लिखा है.
    बोये जाते है बेटे और उग आती है बेटिया
    खाद-पानी बेटो मे और लहलहाती है बेटिया
    एवरेस्ट की ऊचाइयो तक ठेले जाते है बेटे
    और चढ जाती है बेटिया
    रुलाते है बेटे और रोती है बेटिया
    कई तरह गिरते है बेटे और सम्भाल लेती है बेटिया
    सुख के सपने दिखाते है बेटे, जीवन का यथार्थ बेटिया
    जीवन तो बेटो का है, और मारी जाती है बेटिया

    Reply
  20. Tany   November 13, 2010 at 7:52 am

    वाह उषाजी हर बार की तरह बहुत खूब लिखा है.
    बोये जाते है बेटे और उग आती है बेटिया
    खाद-पानी बेटो मे और लहलहाती है बेटिया
    एवरेस्ट की ऊचाइयो तक ठेले जाते है बेटे
    और चढ जाती है बेटिया
    रुलाते है बेटे और रोती है बेटिया
    कई तरह गिरते है बेटे और सम्भाल लेती है बेटिया
    सुख के सपने दिखाते है बेटे, जीवन का यथार्थ बेटिया
    जीवन तो बेटो का है, और मारी जाती है बेटिया

    Reply

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