औरत

औरत

दुनिया की जन्मदाता हैं औरत
हजारो वर्ष पुराने इतिहास की गाथा हैं औरत
जिस पर खड़े है हम ,वो धरती माता हैं औरत
अबला कहा जाता हैं ,वही चंडिका हैं औरत
इस जग में दुखिया का नाम है औरत
चारो धामो का धाम है औरत
भारत के हर त्यौहार का नाम है औरत
ममता का सागर है औरत
बदले की आग का आसमाँ है औरत
मोहब्बत का दरिया है औरत
नफरत का सुलगता सरिया है औरत
प्यार का घुमड़ता बादल है औरत
क्षमा सा बरसता पानी है औरत
मगर हमने इसकी कीमत ना जानी
अजीब दास्ताँ है अजब कहानी
फिर भी भगवान की महान रचना है औरत
केसर क्यारी..उषा राठौड़

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