ऐ बावरी, अपनी मुहब्बत का क्या नाम रखा है ?

अक्सर लोग पूछते है मुझसे , ऐ बावरी, अपनी मुहब्बत का क्या नाम रखा है।
गज़ब ! कैसे जान गया जमाना , तेरे नाम को मैंने अपनी नज्मो में छिपा रखा है।

अजीब ! एक तुम थे जिसने गुनगुनायी थी मेरे संग संग राहो में दिलकश ग़ज़ल।
दे गयी थी राहत मेरे सोजे दिल को कितने सुहाने थे तेरे साथ जो बीते वोह मंज़र।

तेरे शहर की मस्त बहती नदियां मुझे आज भी तेरे अहसास की गहराईया दे जाती है।
कच्चे धागों का यह बन्धन , मेरी रूहे जान भी तेरी गली की हवा में मदहोश रहती है।

लेखिका: कमलेश चौहान (गौरी) : Copy Right at ( Saat Janam Ke Baad)

10 Responses to "ऐ बावरी, अपनी मुहब्बत का क्या नाम रखा है ?"

  1. Prem Singh   June 29, 2013 at 2:14 am

    Nice.. tumhe q bataye.. hame apne baware ka kya nam rakha h…

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  2. सतीश सक्सेना   June 29, 2013 at 3:36 am

    भावनाए बोलती हैं …

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  3. Anil Kumar   June 29, 2013 at 6:12 am

    nice post and cool website,,,,,,,, computer tricks

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  4. vandana gupta   June 29, 2013 at 6:24 am

    अक्सर लोग पूछते है मुझसे , ऐ बावरी, अपनी मुहब्बत का क्या नाम रखा है।
    गज़ब ! कैसे जान गया जमाना , तेरे नाम को मैंने अपनी नज्मो में छिपा रखा है।

    वाह!!!!

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  5. Kuldeep Thakur   June 29, 2013 at 7:28 am

    सुंदर एवम् भावपूर्ण रचना…

    मैं ऐसा गीत बनाना चाहता हूं…

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  6. ताऊ रामपुरिया   June 29, 2013 at 10:45 am

    वाह लाजवाब.

    रचना.

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  7. बहुत सुंदर लाजबाब रचना साझा करने के लिए आभार,,,

    RECENT POST: ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे,

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  8. प्रवीण पाण्डेय   June 30, 2013 at 6:48 am

    सशक्त अभिव्यक्ति..

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  9. dr.mahendrag   June 30, 2013 at 10:31 am

    कौन देता है मुहब्बए को भला कोई नाम,कतरा ए दिल से जो कतरा मिल जाये वो ही तो मुहब्बत है.
    बेहद सुन्दर प्रस्तुति

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