एक अदभूत उपहार

एक अदभूत उपहार

२८ अप्रैल २००९ को पुत्र की शादी में नए ब्लोगर मित्र नरेश जी के अलावा पुराने व अभिन्न मित्र रविन्द्र जी जाजू भीलवाडा से, भवानी सिंह जी (डूकिया),लक्ष्मण सिंह जी (कुकन्वाली),भंवर सिंह जी ( थाणु ) ,सतेन्द्र जी राठी (बिजनोर,उ.प्र.),महिपाल जी (बलोदा),जीतेन्द्र जी (घनाऊ) ,भाजपा नेता सुरेन्द्र सिंह जी (सरवडी),मनोहर सिंह जी (झुनकाबास) आदि शरीक हुए | मेरे घर पर आयोजित होने वाले लगभग सभी शादी समारोह में भाग लेने वाले भाजपा नेता श्री रिछपाल सिंह जी कविया इस बार दार्जिलिंग में श्री जसवंत सिंह के चुनाव प्रचार कार्य में व्यस्त होने के कारण नहीं पहुँच पाए | अब सभी दोस्त व रिश्तेदार शादी समारोह में पहुंचे तो जाहिर है दुल्हे को तो ढेर उपहार सारे मिले | इन उपहारों में एक उपहार बहुत ही अद्भुत था जो लेकर आए थे मेरे अभिन्न मित्र श्री रविन्द्र जी जाजू |

रविन्द्र जी से मेरी मित्रता सीकर के जैन स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ते हुए हुई थी जो आज तक उसी रूप में बरकरार है | हाल में रविन्द्र जी जाजू भीलवाडा में कपडे का बहुत बड़ा कारोबार करते है | अपने बचपन से ही संघ से जुड़े रविन्द्र जी बहुत ही सामाजिक , मिलनसार और लगभग हर विषय से सम्बंधित सुलझे व्यक्ति है | यही वजह है कि रविन्द्र जी का कारोबारी व सामाजिक दायरा देश के लगभग सभी क्षेत्रो में है |
बात चल रही थी अदभूत उपहार कि तो यह उपहार था एक पुस्तक ” स्वदेशी चिकित्सा सार” | डा. अजीत मेहता द्वारा लिखित इस पुस्तक में सिर से पांव तक के चुने हुए रोगों के अचूक घरेलु इलाज के नुस्खे है | इस पुस्तक को मै अदभूत इसलिए कह रहा हूँ क्योकि रेल्वे स्टेशनों की स्टाल पर आसानी से उपलब्ध इस साधारण सी पुस्तक में लिखे नुस्खों का चमत्कार मै पिछले नौ साल से देखता आ रहा हूँ |

मेरा इस पुस्तक से परिचय आज से नौ वर्ष पूर्व सूरत प्रवास के दौरान मेरे एक अभिन्न मित्र रामपाल जी गाडोदिया ने इस पुस्तक की एक प्रति दिखाते हुए दिल्ली रेल्वे स्टेशन से एक पुस्तक खरीद कर भिजवाने के आग्रह के साथ कराया था | सूरत से दिल्ली पहुंचते ही मैंने दो पुस्तके खरीदी एक रामपाल जी को भेज दी व दूसरी प्रति पर मेरे एक अन्य मित्र अरुण खुराना की नजर पड़ गयी | जिन्होंने पढने के बाद यह पुस्तक अपने पास ही रखली और वे पिछले नौ सालो से बीमार पड़ने पर इस पुस्तक में लिखे घरेलु नुस्खो से ही अपना व अपने परिवार का इलाज करते है और आज तक इन नौ सालों में उनके परिवार का कोई सदस्य कभी डाक्टर के पास नहीं गया | इसी चमत्कार को देखकर ही मै इस पुस्तक को अदभूत कहता हूँ |
रविन्द्र जी जाजू ने भी इस पुस्तक के कई नुस्खो व उपायों को आजमाया है और अब बकौल रविन्द्र जी कि ” इस पुस्तक की मै २०० से २५० के लगभग प्रतियां हर वर्ष खरीदता हूँ और जहाँ भी उपहार देना होता है स्वस्थ जीवन की कामना के साथ यह पुस्तक उपहार स्वरूप भेंट करता हूँ | साथ ही मजाक में कहते है कि ” कई लोग तो मुझे समारोह में आने का निमंत्रण भी इसीलिए देते है कि आएगा तो उपहार में “स्वदेशी चिकित्सा सार ” पुस्तक तो भेंट मिल ही जायेगी |

नरेश जी व अन्य मित्रों के साथ

ज्ञान दर्पण पर ५ जून २००९ को प्रात: ५.५५ बजे क्रांतिकारी कवि केसरी सिंह बारहट का परिचय प्रकाशित होगा |

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