इसलिए किये जाते हैं पत्रकार ट्रोल

इसलिए किये जाते हैं पत्रकार ट्रोल

सोशियल मीडिया पर अक्सर पत्रकार ट्रोल होते नजर आ जायेंगे | रविश कुमार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है | एक खास विचारधारा के लोगों ने पिछले कुछ वर्षों से रविश कुमार को निशाने पर ले रखा है और सोशियल मीडिया में उसे गालीगलौच लिखने के साथ फोन पर भी धमकियां दी जाती है, ठीक इसी प्रकार राजस्थान में आनन्दपाल एनकाउन्टर प्रकरण के समय न्यूज़ 18 राजस्थान चैनल के प्रमुख श्रीपाल सिंह शक्तावत सोशियल मीडिया में ट्रोल हुए | श्रीपाल शक्तावत से आनंदपाल एनकाउन्टर की सीबीआई की जांच की मांग को लेकर आन्दोलन कर रही करणी सेना को नाराजगी थी कि वे उनकी ख़बरें सही नहीं दिखाते |

वर्तमान लोकसभा चुनावों में भी सीकर के पत्रकार डा. यशवंत चौधरी जिनका सीकर टाइम्स के नाम से मीडिया संस्थान है, नागौर जिले के एक नेताजी के समर्थकों के निशाने पर है | डा. यशवंत चौधरी के फेसबुक पेज पर नेताजी के समर्थकों द्वारा जहाँ गालीगलौच लिखी जा रही है वहीं फोन पर भी उन्हें अभद्र भाषा के साथ धमकियाँ दी जा रही है | दरअसल नेताजी के समर्थक चाहते है कि क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए डा. यशवंत के मीडिया संस्थान पर नेताजी के भाषण, उनके समर्थन वाले चुनावी विश्लेषण व प्रचार वाले वीडियो ज्यादा हो |

लेकिन डा. चौधरी अपने सीमित संसाधनों के चलते सीकर से नागौर जाकर उन नेताजी की रैलियां कवर नहीं कर सकते और ना उनके पास बड़े मीडिया घरानों की तरह इतने पत्रकार हैं कि नेताजी की ख़बरें उनके पास तक पहुँचती रहे | दूसरा कारण सुरक्षा को लेकर है | आपको बता दें सीकर में बेबाक पत्रकारिता करने के कारण डा. चौधरी पर दो बार जानलेवा हमले हो चुके हैं, अत: सुरक्षा कारणों के चलते डा. चौधरी का हर तरह की सार्वजनिक रैलियों में भाग लेना संभव नहीं है | यही कारण है कि उनके चैनल पर नेताजी की ख़बरें कम है जो नेताजी के समर्थकों के चुभ रही है और वे डा. चौधरी पर कांग्रेसी एजेंट होने का आरोप लगाते हुए उन्हें ट्रोल कर रहे हैं |

जिस प्रकार आनंदपाल प्रकरण में श्रीपाल शक्तावत ट्रोल किये गए और अब डा. चौधरी ट्रोल किये जा रहे हैं, ऐसे में उन लोगों की मानसिकता समझी जा सकती है जो डरा धमकाकर मीडिया में अपना प्रचार चाहते हैं | यदि मीडिया द्वारा ख़बरों को लेकर आपके साथ भेदभाव किया जा रहा है तो आप मीडिया की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र है, मैं खुद मीडिया का एक अंग होने के बावजूद कई मामलों में मीडिया की खुलेआम आलोचना करता हूँ पर किसी पत्रकार को आप व्यक्तिगत टार्गेट कर अपनी ख़बरें चलवाने के बजाय उसे अपना दुश्मन ही बना रहे हैं | उदाहरण आपके सामने है – आनंदपाल प्रकरण में श्रीपाल शक्तावत को व्यक्तिगत टारगेट करने के बाद मीडिया में इस प्रकरण की खबरें नजर नहीं आई और करणी सेना के एक गुट के अध्यक्ष का एक टीवी चैनल द्वारा स्टिंग तक कर दिया गया | ठीक इसी तरह डा. यशवंत चौधरी को नागौर के नेताजी के समर्थकों ने टार्गेट कर अपने नेताजी का ही नुकसान किया है, बेशक उनके नेताजी यह चुनाव भी जीत जाए पर एक पत्रकार को उनका विरोधी बना दिया गया जो आने वाले समय नेताजी की पोलें खोलकर छवि को बिगाड़ सकता है, वैसे भी नेताजी के पूर्व में बोले जहरीले बोल उनकी छवि बिगाड़ने के लिए काफी, जिन्हें जनता के सामने लाने की ही देर है और एक पत्रकार यह काम भलीभांति कर सकता है |

इस तरह साफ़ है कि पत्रकारों को ट्रोल करने के पीछे अपनी ख़बरें अपनी मनमर्जी से चलवाने की मानसिकता जिम्मेदार है पर ऐसी मानसिकता रखने वालों को समझ लेना चाहिए कि ख़बरें डराने धमकाने से नहीं चलती, पत्रकारों के साथ सदभावना रखिये, उन्हें प्रेस नोट भेजिए, अपनी रैलियों में व्यवस्था के साथ पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कीजिये व आदर कीजिये, आपकी ख़बरें सिर्फ चलेगी ही नहीं दौड़ेगी पर यह दिमाग से निकाल दीजिये कि हर पत्रकार बिकाऊ है |  बिकते मीडिया घराने है पत्रकार नहीं |

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