इतिहास चोरी रोकनी है तो ये करना ही होगा

इतिहास चोरी रोकनी है तो ये करना ही होगा

इतिहास चोरी को लेकर आज राजपूत युवा सबसे ज्यादा आक्रोशित है, जिसकी अभिव्यक्ति वह अक्सर सोशियल मीडिया में करता रहता है | दरअसल जबसे सोशियल मीडिया प्रचलन में हुआ है हर कोई उसका इस्तेमाल अपने अपने एजेंडे के रूप में कर रहा है | इतिहास चोरी का काम भी इन्टरनेट पर ही खूब हो रहा है | कोई अपना गौरान्वित इतिहास बनाने के चक्कर में क्षत्रियों महापुरुषों को अपनी जाति से जोड़कर लेख प्रकाशित कर रहा है तो कोई मन में विद्वेष रखते हुए किसी जाति का इतिहास बिगाड़ने में लगा है | यदि ये सब सोशियल मीडिया के माध्यम से हो रहा है तो इसका जबाब भी सोशियल मीडिया पर ही दिया जाना चाहिये|

किताबें छापना महंगा सौदा होता है और किताबों की प्रसार संख्या भी इतनी नहीं हो सकती जितनी सोशियल मीडिया की है | एक लेख या वीडियो लाखों लोगों तक मुफ्त में पहुँच जाता है | अत: समाज के युवाओं को दूसरों से बहस कर समय ख़राब करने के बजाय ज्यादा से सोशियल मीडिया पर लेख लिखे और वीडियो बनाकर अपना इतिहास प्रचारित करे |

कई बार बात आती है कि समाज के भामाशाह आगे आयें और इसके लिए धन उपलब्ध करायें, इस सम्बन्ध में मेरा मानना है कि इतिहास पर काम करने वाला कोई भी स्वाभिमानी क्षत्रिय दान नहीं लेगा | फिर प्रश्न खड़ा होता है कि इतिहास पर काम करने वाला इसके लिए खर्च कहाँ से निकाले ? इसकी फंडिंग कैसे हो ? इस प्रश्न का सीधा उत्तर है यूट्यूब, गूगल व फेसबुक वीडियो, ब्लॉगस व वेब साईट पर विज्ञापन देती है जिससे कोई भी अपना खर्च निकाल सकता है पर इसके लिए समाज के युवाओं के सहयोग की आवश्यकता है |

समाज बंधुओं को बस एक काम करना है – इतिहास पर लेख लिखनेवीडियो बनाने वालों के लेख पढ़ें और ज्यादा से ज्यादा वीडियो देखें और दूसरों को भी दिखाएँ |  आप इतिहास के वीडियो ज्यादा से ज्यादा देखेंगे तभी बनाने वाले को आय होगी और उसका खर्च निकल पायेगा | इसके तीन फायदे होंगे पहला आपका इतिहास ज्ञान बढेगा, दूसरा बनाने वाले का खर्च निकल आयेगा और तीसरा फायदा इन्टरनेट पर हमारा सही इतिहास उपलब्ध होगा |

यदि आप इतिहास पर वीडियो बनाने वाले के वीडियो ज्यादा से ज्यादा और पूरे देख रहे हैं तो आप इतिहास की जानकारी लेने के साथ वीडियो बनाने वाले को फंडिंग भी कर रहे हैं ये बात हमेशा ध्यान में रखें |

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