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Tuesday, January 25, 2022

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आशियाने

आशियाने


देखा होगा सागर किनारे मिट्टी के घरोंदो को टूटते हुए …….उन पर बच्चो को रोते हुए ……….पर .…….पर …….देखा है मेने घरो को उजड़ते हुए …….जवानों को देखा है मैने झोपड़े हटाते हुए ………बच्चो को चिलाते हुए ….माँ को सहलाते हुए ……….पास की इमारत के लोग देख रहे है इस नज़ारे को अपनी खिडकियों से ……..प्यासे के पानी मांगने पर भगा रहे है झिडकियो से ……….देखा है मैने घरो को उजड़ते हुए …………….देखा है शान से लोगो को वहाँ खड़े हुए …………..देख रहे है जो तिनको को बिखरते हुए ,……….किसी के आशियाने को उजड़ते हुए धुल को उड़ते हुए ……देखा है मैने घरो को उजड़ते हुए …………..झोपड़े ही क्यों देखा है मैने दुनिया की ऊँची इमारतों में रहने वालो को भी बिलखते हुए ……देखा है मैने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से हवाई विमान टकराते हुए ………देखा है मैने घरो को उजड़ते हुए ……………….

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18 COMMENTS

  1. Dua hai Ki Kamyabi ke har sikhar per aap ka naam hoga,Aapke har kadam per duniya ka salaam hoga,Himmat se mushkilon ka saamna karna koi aapse sikhe,Hamari dua hai ki waqt bhi ek din aapka gulam hoga.Well Done Girl Keep Going 🙂

  2. झोपड़े ही क्यों देखा है मैने दुनिया की ऊँची इमारतों में रहने वालो को भी बिलखते हुए
    @ ये तो समय चक्र है सभी के साथ आता है कभी झोपड़े में तो कभी महल में |

    बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति ! दर्द वही महसूस करता है जिसके चोट लगी हो !

  3. उजडना बसना ये प्रकृति का नियम है | आपकी कविता में एक दर्द की अभिव्यक्ती भी है एक बेबस का दर्द आज कल बहुत कम लोग समझ पाते है |

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