आपराधिक छवि का नेतृत्व : पनपने का कारण और निवारण

भारतीय राजनीति में आपराधिक छवि के लोगों के बढ़ते वर्चस्व से देश का हर समझदार नागरिक चिंतित है| बावजूद आपराधिक छवि के लोगों की संसद व विधानसभाओं में संख्या बढती जा रही है| यही नहीं जातीय सामाजिक संगठनों के नेतृत्व पर आपराधिक प्रवृति के लोगों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है| जातीय संगठनों के नेतृत्व पर नजर डाली जाय तो आज देश का युवा वर्ग अपनी जाति का नेतृत्व किसी दबंग के हाथों में देखना चाहते हैं और यही कारण है कि आज कुख्यात गैंगस्टर तक युवाओं के आदर्श हैं| ऐसा क्यों ? वे कौनसे कारण है कि नेतृत्व को लेकर चरित्रहीन लोग युवाओं का आकर्षण बन रहे हैं|

इस सम्बन्ध में हमने क्षत्रिय चिन्तक श्री देवीसिंह जी महार साहब से चर्चा की तो उन्होंने इसके कारणों व निवारण पर विस्तार से बताया| महार साहब ने बताया कि हमारा देश वीर पूजक देश है| यहाँ वीरों का नेतृत्व स्वीकार किया जाता है| समाज के विभिन्न मुद्दों पर अच्छे व योग्य लोग डर के मारे सरकार के खिलाफ बोलते ही नहीं, लिहाजा उन्हें कायर समझा जाता है और सरकार के सामने बोलने वाले लोग भले ही वे चरित्रहीन हों, आपराधिक छवि वाले हों, गुण्डे या गैंगस्टर हों को वीर समझकर उनका नेतृत्व स्वीकार लिया जाता है| जो देश व समाज के भविष्य के लिए घातक है|

महार साहब ने इस समस्या का हल बताते हुए हमें बताया कि समाज के योग्य व अच्छे लोगों को समाज के सामने वीरता प्रदर्शित करनी होगी| योग्य व्यक्ति जब समाज के सामने वीरता प्रदर्शित करेंगे तब समाज स्वत: उन्हें नेता स्वीकार लेगा| इस तरह से महार साहब ने इस समस्या का निवारण बताया| यदि आप उन्हें विस्तार से सुनना चाहते है तो यहाँ क्लीक कर महार साहब को वीडियो में सुनें|

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