आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो

आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो

ऑरकुट पर स्क्रब में तरह तरह की कविताए आदि मिलते रहती है पेश है उन्ही में से मिली कुछ दोस्तों की स्क्रब कविताए
जोधपुर से राज शेखावत
ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो …
ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो …

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आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो …
आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो …

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आज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो …
घर जा नहीं सकते तो फ़ोन कर के ही खुश रहो …

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आज कोई नाराज़ है, उसके इस अंदाज़ में भी खुश रहो …
जिसे देख नहीं सकते उसकी आवाज़ में ही खुश रहो …

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जिसे पा नहीं सकते उसकी याद में ही खुश रहो
Laptop न मिला तो क्या , Desktop में ही खुश रहो …

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बिता हुआ कल जा चूका है , उसकी मीठी यादों में ही खुश रहो …
आने वाले पल का पता नहीं … सपनो में ही खुश रहो …

Zindagi hai to Khwaab Hai
_Khwaab Hai To Manzilein Hai
____Manzilein Hai To Fasaley Hai
__________Fasaley Hai To Rastey Hai
_________Rastay Hai To Mushkilein Hai
_____________Mushkilein Hai To Hausla Hai
_________________Hausla Hai To Vishawas Hai
______________________Vishvas hai to Paisa hai
________________________Paisa hai to Shohrat hai
__________________________Shohrat hai to Izzat Hai
______________________________Izzat hai to Ladki hai
__________________________Ladki hai to Tension hai
______________________Tension hai to Concern hai
__________________Concern hai to a Khayaal hai
_________________Khayaal hai to Khwaab hai
______________Khawab hai to Growth hai
__________Growth hai to Zindagi hai
______Zindagi hai to khwaab hai
_Matlab duniya Gol Gol hai
Bas ghumnewala chahiye

अमरकोट पाकिस्तान से कँवल सोढा ने यह कविता भेजी

ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती,
हर बात समझाने के लिए नही होती,
याद तो अक्सर आती है आप की,
लकिन हर याद जताने के लिए नही होती

महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है,
मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है

कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है
प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है
अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे
नींद आती नही और रात गुज़र जाती है

उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं

कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है
छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है…

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17 Responses to "आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो"

  1. बहुत खूब, जिन्दगी को मौज से जियो, हर हाल में!

    Reply
  2. श्यामल सुमन   April 6, 2009 at 12:44 am

    नीरज गोस्वामी की पँक्तियाँ इसी क्रम में-

    जब तलक जीना है यारो मुस्कुराते ही रहो।
    क्या पता हिस्से में कितनी बच गयी है जिन्दगी।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    [email protected]

    Reply
  3. Udan Tashtari   April 6, 2009 at 1:15 am

    मुक्तक जबरदस्त हैं. आभार.

    Reply
  4. संगीता पुरी   April 6, 2009 at 1:54 am

    बहुत बढिया है।

    Reply
  5. dhiru singh {धीरू सिंह}   April 6, 2009 at 2:08 am

    kush hi rahenge kush hi rakhenge

    Reply
  6. “उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
    वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
    सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
    लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं”
    मुक्तक बहुत बढिया है।
    बधाई स्वीकार करें।

    Reply
  7. काजल कुमार Kajal Kumar   April 6, 2009 at 2:31 am

    इस ज़माने में भी हैं ग़ालिब बहुत. -:)

    Reply
  8. डॉ. मनोज मिश्र   April 6, 2009 at 3:11 am

    सुंदर हैं सभी .

    Reply
  9. ताऊ रामपुरिया   April 6, 2009 at 4:13 am

    बहुत बढिया है जी.

    त्रामराम.

    Reply
  10. RAJIV MAHESHWARI   April 6, 2009 at 4:35 am

    अच्छी कविताओ से परिचय कराया.
    सुंदर मुक्तक से सजी सुंदर कविता

    शुक्रिया शेखवत भाई.

    Reply
  11. रंजन   April 6, 2009 at 5:41 am

    खुश रहो… क्योंकी आज सोमवार है..:)

    Reply
  12. परमजीत बाली   April 6, 2009 at 6:07 am

    बहुत बढिया पोस्ट प्रेषित की है।

    Reply
  13. सकारात्मक सोच का इससे बेहतर नमूना नहीं हो सकता.. आभार

    Reply
  14. P.N. Subramanian   April 6, 2009 at 8:09 am

    कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
    वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है
    बढ़िया संकलन.

    Reply
  15. विष्णु बैरागी   April 6, 2009 at 1:06 pm

    जिन्‍दगी का राज है खुश रहो
    मौका ए आगाज है खुश रहो

    है कमी सबके यहां खुश रहो
    है गमी सबके यहां खुश रहो

    आप-हम हैं इसी में खुश रहो
    नहीं कोई कम है खुश रहो

    Reply
  16. मुनीश ( munish )   April 6, 2009 at 1:41 pm

    vaah sab ! kya baat hai!

    Reply
  17. नरेश सिह राठौङ   April 6, 2009 at 1:59 pm

    इस प्रकार के स्क्रेप सभी लोग पढते है लेकिन इन्हें ब्लोग पर नही लगाते यही गलती करते है । ओर्कुट पर बहुत ही अच्छा साहित्य बिखरा पडा है । जरूरत है अच्छे ब्लोगो पर प्रकाशित करने कि जिससे उसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ पाये । आपका बहुत आभार ।

    Reply

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