आज का ख्याल -3

आज का ख्याल -3


आज कल बारिश की वजह से आपको कही भी चीटियों की लम्बी लम्बी कतारे देखने को मिल जाएगी ,मेरे घर की बालकनी मे भी आज कल रोज उनका राज है.कभी कभार रसोई मे भी पहुच जाती है रास्ते मे किसी डब्बे का ढक्कन खुला मिल जाता है तो उसमे से अपनी रसोई के लिए थोडा राशन पानी भी निकाल के ले जाती है ,बहुत गुस्सा आता है इन पर ,पर उनकी एक बात मुझे बहुत भा गई वो है उनका अनुशासन .क्या गजब का है उनका अनुशासन ,मजाल है कि उनकी लाइन टूट जाये ,डब्बे में घुसेगी अपने लिए राशन लेगी और बाहर आकर वापस उसी लाइन से चलने लगेगी .कोई जल्दी नहीं किसी से भी आगे निकालने की .बस चलती रहती है , बहुत व्यस्त रहती है ,फिर भी आप एक बात देखो इतनी व्यस्त होने के बावजूद भी एक दुसरे से रुक कर गले मिलाती है या पता नहीं एक दुसरे से क्या हेल्लो शेल्लो करती है .पर करती जरुर है,इनके बारे मे एक बात आप सब ने देखी होगी नहीं देखा है तो अब जरुर देखना .कि जब चीटियों की लाइन कही जा रही हो उसमे से आप एक चिंटी को हलके से किसी भी चीज से या हाथ से छू देना ,फिर देखो आप वो भागेगी पर सिर्फ अपनी जान बचाकर नहीं बल्कि सभी चीटियों को बता देगी कि आगे न जाये खतरा है ,और ये क्या? सब की सब वापस मुड जाती है.इनका ट्रफिक कंट्रोल तो बिना ट्रेफिक पुलिस वाले के भी क्या कमाल का होता है. आस पास कितनी भी जगह क्यों न हो ये अपनी कतार नहीं तोडती .
अगर एसा ही खुली जगह इंसानों को मिल जाये तो …….?
हो गया फिर तो लाइन मे चलना तो खैर दूर की बात है पर हाँ उसे तोडना तो कोई इंसानों से सीखो.अगर आगे कोई खतरा है तो खुद ही भगदड़ मचा के खुद भी मरेगा और दुसरो को भी . और ट्रेफिक तो आप इनका पूछो ही मत.मैंने
सुना भी है और पढ़ा भी है की सभी प्राणियों मे मनुष्य सबसे अधिक बुद्धिमान है,पर ये सब देखने के बाद तो मेरे दिमाग मे कुछ और ही ख्याल आता है…………………..
अब मेरे कोई काम तो है नहीं तो बस ऐसे ही ख्याल आते रहते है. अब आ गया तो आपको भी बता दिया बस……..
आप तो चित्र देख कर ही समझ जायेंगे ज्यादा तो लिखने की जरुरत ही नहीं है………..

केसर क्यारी …..उषा राठौड़

असिस्टेंट कमान्डेंट राज्यश्री राठौड़ :राजस्थान की पहली महिला पायलट
ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार
ताऊ डाट इन: ताऊ पहेली – 86

21 Responses to "आज का ख्याल -3"

  1. Ratan Singh Shekhawat   August 8, 2010 at 4:25 am

    सही कहा आपने |
    ट्रैफिक व्यवस्था में तो हम भारतीय एक दम अनाड़ी है राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में तो ट्रेफिक नियम तोडना लोग अपनी शान समझते है | और इसकी आदत की वजह से ट्रैफिक जाम लगाकर खुद ही परिणाम भुगतते भी है |
    काश हम ट्रैफिक व अनुशासन की प्रेरणा नन्ही चीटियों से ले सके |

    Reply
  2. Uncle   August 8, 2010 at 4:28 am

    छोटी-छोटी बातों से गंभीर प्रेरणादायक बाते निकलना तो कोई आपसे सीखें

    Reply
  3. Rajul shekhawat   August 8, 2010 at 5:08 am

    वाह ..!!क्या बात लिखी है आपने ……बिलकुल सही लिखा है ….हम इंसानों के लिए चाहे कितने भी नियम – कानून बनाये जाए …सब कम है ….अगर सब लोग इतनी छोटी-छोटी बातों की तरफ ध्यान दे तो काश हम भी ट्रैफिक व अनुशासन की प्रेरणा इन नन्ही चीटियों से ले सकते है |

    Reply
  4. Mahavir   August 8, 2010 at 7:07 am

    wah really sachi bat likhi hai aapne !

    Reply
  5. ललित शर्मा   August 8, 2010 at 8:30 am

    इंसान नियम बनाते हैं और उसे तोड़ते हैं।
    लेकिन चींटियों के लिए कुदरत ने नियम बनाए हैं।
    इसलिए उन नियमों को कुदरत ही तोड़ सकती है।

    लेकिन कुदरत से सीखता कौन है? मनुष्य को भ्रम है कि वह कुदरत से बड़ा है। लेकिन यह भ्रम बड़ी जल्दी टूट भी जाता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

    अच्छी पोस्ट
    आभार

    Reply
  6. नरेश सिह राठौड़   August 8, 2010 at 11:18 am

    आपने तो चीटीयो पर बहुत ज्यादा शोध कर डाला है | अनुशासन जिंदगी में बहुत जरूरी है और ट्राफिक के मामल में तो और भी जरूरी है |नहीं तो जिंदगी ही चली जाती है | बहुत सुन्दर बात कही है |

    Reply
  7. राज भाटिय़ा   August 8, 2010 at 12:20 pm

    हमे सब से बहुत कुछ सीखना चाहिये, कुते से भी हमे सीखना चाहिये यानि हम इतने गये….. बहुत सही ओर सटीक लिखा आप से सहमत है, ओर धन्यवाद इस सुंदर लेख के लिये

    Reply
  8. ताऊ रामपुरिया   August 8, 2010 at 2:39 pm

    बहुत सटीक उदाहरण देकर समझाया आपने. भुत आभार.

    रामराम.

    Reply
  9. क्षत्रिय   August 8, 2010 at 3:44 pm

    सटीक उदहारण

    Reply
  10. बेचैन आत्मा   August 9, 2010 at 2:29 am

    सार्थक पोस्ट.
    चीटियों के माध्यम से आपने इंसानों को अनुशासन की अच्छी सीख दी है. इस विषय में मैने भी एक कविता लिखी है. कभी मौका मिला तो जरूर पोस्ट करूंगा.
    ..बधाई.

    Reply
  11. प्रवीण पाण्डेय   August 9, 2010 at 2:57 am

    बहुत सुन्दर विश्लेषण। देखकर तो लगता है कि हम चीटियों से भी गये गुज़रे हैं।

    Reply
  12. Tany   August 9, 2010 at 8:15 am

    Well Said & Nicely Potrayed Ushaji.Congrats Keep going & Keep it up.

    Reply
  13. अन्तर सोहिल   August 9, 2010 at 11:23 am

    प्रेरक ख्याल है ये तो

    प्रणाम

    Reply
  14. Pagdandi   August 10, 2010 at 3:24 am

    aap sab ka bhut bhut aabhar ..aur tahe dil se shukriya.

    Reply
  15. रंजना   August 10, 2010 at 7:51 am

    सही कहा आपने…मनुष्य बनने के लिए पशु, पक्षियों,नन्हे जीवों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है हमें…

    Reply
  16. praveen singh bohra   August 12, 2010 at 4:39 pm

    ye link aap ke liye faydemand ho sakta hai
    http://blogowners9.blogspot.com

    Reply
  17. Kishor Singh   August 13, 2010 at 7:01 am

    Medam Aapne Trafic Cantrol k bare good exampale k sath logo ko accha msg diya hai..aapki lekhani ko salam..

    Reply
  18. Rahul Singh   August 14, 2010 at 3:38 am

    आपने चींटियों की पंक्ति को छूने का आ‍इडिया दे दिया है, 'बु‍िद्धमान मनुष्‍य' यातायात अनुशासन के बजाय यही प्रयोग करने की नसीहत जल्‍दी ग्रहण कर लेता है.

    Reply
  19. अविनाश वाचस्पति   August 14, 2010 at 3:40 am

    चींटी ही नहीं
    प्रत्‍येक उस से
    जो इंसान नहीं है
    हम बहुत कुछ
    बल्कि सब कुछ
    सीख सकते हैं
    नजर सीधी हो
    तो सब संभव है।

    Reply
  20. प्रमोद ताम्बट   August 14, 2010 at 4:46 am

    इतना ही नहीं चीटियाँ यह भी सिखाती हैं कि एक समाज में किस तरह से रहा जाना चाहिए। कैसे एकत्र किये संसाधनों को मिल बाट कर उपयोग करना चाहिए। किस तरह से कत्र्तव्यों का निर्वहन अपने समाज के हित में करना चाहिए। कैसे जात-पात धर्म सम्प्रदाय के मनमुटावों के बगैर अपने समाज के हित में एक जुट होकर बाधाओं को पार करना चाहिए। वाकई चीटियाँ काफी कुछ सिखाती है।

    Reply
  21. संजय भास्कर   August 19, 2010 at 1:14 am

    बहुत सुन्दर विश्लेषण। देखकर तो लगता है कि हम चीटियों से भी गये गुज़रे हैं।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.