अब दाल बाटी चूरमा भी बनता है ऐसे हाईटेक तरीके से

अब दाल बाटी चूरमा भी बनता ऐसे हाईटेक तरीके से :- राजस्थान के शेखावाटी आँचल के किसान बालाजी महाराज यानी हनुमान जी के भक्त है| शेखावाटी क्षेत्र के हर उस खेत में जहाँ सिंचाई के लिए कुआं या ट्यूबवेल है उस खेत में बजरंग बलि का छोटा सा मंदिर होना किसानों की आस्था दर्शाने के लिए काफी है| किसी भी खेत में आजकल ट्यूबवेल और पहले जब कुँए खोदे जाते थे, उससे पहले हनुमान जी महाराज की प्रतिष्ठा अवश्य की जाती थी| यहाँ के किसान पाताल लोक के पानी को बजरंग बलि की मेहरबानी मानते हैं| किसानों का मानना है कि बजरंग बलि प्रसन्न होंगे तभी कुँए में पर्याप्त पानी मिलेगा, यही नहीं कुआं खोदने से पहले स्थान चिन्हित करने के लिए पहले बालाजी महाराज के पुजारी से बुझा करवाई जाती है और उसके सुझाए स्थान पर ही कुआं या ट्यूबवेल खोदा जाता है|

बालाजी महाराज को प्रसन्न करने के लिए यहाँ के किसान उनकी प्रसादी के तौर पर सवा मणी करते हैं| सवा मणी का मतलब सवा मन अनाज का चूरमा बनाना| प्रसाद के तौर पर बना यह सवा मन का चूरमा दाल के साथ खाया जाता है| जब गांवों में जनसँख्या कम थी तब गांव के सभी लोग बिना जातीय भेदभाव के सवा मणी का दाल बाटी चूरमा खाने एकत्र होते थे| आज जनसँख्या बढ़ने के बाद सवा मणी में एक क्विन्टल से ज्यादा अनाज का चूरमा बनाया जाता है और गांव में जिन जिन से अच्छे पारिवारिक सम्बन्ध है उन्हें ही बुलाया जाता है|

कई बार अच्छी फसल होने खुश किसान दाल बाटी चूरमा वाली सवा मणी का आयोजन करते है इसके दो फायदे है एक तरफ बालाजी महाराज खुश, दूसरी तरफ एक तरह का गेट टू गेदर भी हो जाता है| इस बहाने सभी से मिलना जुलना हो जाता है| सवा मणी में बनने वाला चूरमा बाटी को पीस कर बनाया जाता है| पहले गेंहू के आटे की बाटियां बनाई जाती है जिन्हें गोबर के उपलों के अंगारों व राख में सैका जाता है| पकने पर बाटियां को ओखली में कूट कर उसका चूरमा बना लिया जाता है| आजकल ओखली की जगह चक्की में पीसकर भी चूरमा बना लिया जाता है| चूरमा में जितने किलो गेहूं होगा उसके आधे वजन के बराबर बारीक चीनी यानी खांड मिलाई जाती है| सम्पन्न किसान काजू, बादाम, इलाइची आदि कई तरह के सूखे मेवे भी मिलाते हैं| पर हाँ देशी घी मिलाना भी आवश्यक है|

चूरमा बनने के बाद इसे दाल के साथ खाया जाता है| इस तरह दाल बाटी चूरमा की सवा मणी होती है यानी किसान अपने आराध्य बालाजी महाराज के लिए सवा मणी रूपी प्रसादी करवा कर अपने आपको धन्य समझता है|

सवा मणी में बाटी और हाईटेक चूरमा कैसे बनाया जाता है इसके लिए यहाँ क्लिक कर वीडियो में देखें|

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