अब घर में ही घोटो और पीवो

गांव के बाहर एक बाबा जी का आश्रम था बाबा जी भांग का नशा करते थे अतः आश्रम में नित्य भांग घोटने का कार्य होता रहता था | गांव के कुछ निट्ठले युवक भी भांग का स्वाद चखने के चलते रोज बाबा जी के पास चले आया करते थे | इनमे से कुछ युवक भांग का नित्य सेवन करने के कारण भांग के नशे के आदि हो चुके थे अतः वे रोज भांग पीने के चक्कर में बाबा जी के आश्रम पर पहुँच ही जाते फलस्वरूप बाबा जी का भांग का खर्च बढ़ गया जिसे कम करने के लिए बाबा जी ने निश्चय कर लिया था |

एक दिन उनका एक एसा चेला जीवा राम जो भांग के नशे का आदि हो चूका था हमेशा की तरह आश्रम पहुंचा | आश्रम का दरवाजा बंद देख जीवा ने बाबा जी को आवाज लगाई |
जीवा :- बाबा जी ! बाबा जी !! दरवाजा खोलिए |
बाबा जी :- अरे कौन ?
जीवा :- बाबा जी ! मै जीवो !
बाबाजी :- बेटा ! अब घर में ही घोटो और पीवो |

मुफ्त का माल समझ सेवन करने वाले ऐसे ही आदि हो जाते है अतः मुफ्त के माल का सेवन करने में भी मितव्यता बरतनी चाहिए |

14 Responses to "अब घर में ही घोटो और पीवो"

  1. M VERMA   November 15, 2009 at 3:49 am

    सही है कब तक मुफ्त का माल उडाने देते

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  2. काजल कुमार Kajal Kumar   November 15, 2009 at 5:24 am

    🙂

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  3. धीरेन्द्र गोदारा   November 15, 2009 at 8:32 am

    wahh bahut achha Ratan Singh Ji.

    रतनसिंह जी आपने जाटों की दुखती हुई रग पर हाथ रखा है। जाट आज की तारीख में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे हैं, लेकिन ऐसी शिक्षा किस काम की, जो संस्कार विहीन हो। अगर आप साक्षर हैं, पढ़े-लिखे हैं, तो आप अपना, अपने परिवार का और अपने समाज का अच्छा या बुरा समझ सकते हैं। लेकिन…. (log on – http://jujharujat.blogspot.com/2009/11/blog-post.html?showComment=1258273714154#c7864400390827945270

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  4. राज भाटिय़ा   November 15, 2009 at 11:42 am

    बहुत सुंदर जी….

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  5. कुन्नू सिंह   November 15, 2009 at 11:47 am

    बिलकूल सही, अपनी मेहनत से खरीदा समान ही हमारे लिये बहुत मुल्यवान होता है और मुफ्त मे मिलने वाले समान कि किमत ना लेने वाला करता है और ना ही देने वाला।

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  6. Udan Tashtari   November 15, 2009 at 12:25 pm

    हा हा!! बाबा जी तो शायर हो गये!! 🙂

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  7. dhiru singh {धीरू सिंह}   November 15, 2009 at 3:33 pm

    लत तो लग ही गई क्या घर क्या बाहर . नशा ऎसे ही फ़ैलाया जाता है . पहले फ़्री फ़िर ….

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  8. ताऊ रामपुरिया   November 15, 2009 at 3:44 pm

    बेटा ! अब घर में ही घोटो और पीवो |

    बहुत जोरदार.:)

    रामराम.

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  9. ललित शर्मा   November 15, 2009 at 4:21 pm

    रतन सिग जी, जब आपकी पोस्ट आई थी तो घोटणे लगे थे(नेट बंद) अब जाके माल तैयार हुआ है, आओ पधारो पहली धार की है-स्वागत है।

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  10. बहुत बढ़िया!
    जब माल-पानी खत्म हो जायेगा तो बात करेंगे!

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  11. रोचक और मजेदार जवाब दिया बाबाजी ने। लेकिन जीवो वापस कत्तई नहीं गया होगा। नशा कैसा जो छूट जाय..? 🙂

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  12. रंजन   November 16, 2009 at 7:20 am

    मुफ्त का चंदन घिसो मेरे नंदन.. पर कब तक..

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  13. Rambabu Singh   November 26, 2009 at 1:50 am

    बहुत जोरदार.:)

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  14. अजय कुमार झा   July 3, 2011 at 3:33 am

    हा हा हा हा अरे ये पोस्ट तो मजेदार निकली तो भांग के पौधे भी लगा ही डालें । ताकि मेहमानों की खातिरदारी जरा झूमझाम के की जाए । व्हाट एन आयडिया सर जी

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