अपने राजाओं से असीम प्यार करती थी उनकी प्रजा

दिखने के यह विरोधाभास सा लग सकता है, लेकिन सत्य वास्तव में यही है कि क्या पुराने युग में और क्या नए युग में, सत्ता और शक्ति का आधार जनसाधारण ही रहा है|

अपने राजाओं से असीम प्यार करती थी उनकी प्रजा

राजाओं की राजशाही व्यवस्था हो या लोकतांत्रिक हो, सफलता से शासन वही कर पाया है जिसे जनता ने चाहा है| इतिहास उठाकर देखलें जनविरोधी शासन चाहे राजा का हो या लोकतांत्रिक जनता ने उसे उखाड़ फैंका है| ईसा पूर्व पाटलिपुत्र का राजा धनानंद इतना शक्तिशाली था कि विश्व विजय की कामना पर निकला सिकन्दर भी उसके डर से व्यास से आगे नहीं बढ़ा और लौट गया| पर उसी राजा के प्रति प्रजा के असंतोष का फायदा उठा चंद्रगुप्त मौर्य ने उसका तख्ता पलट दिया| इसलिए जोधपुर के पूर्व महाराजा हनवंतसिंह जी ने नेहरु द्वारा राजाओं को चुनाव में भाग लेने से रोकने के लिए उनका प्रिवीपर्स रोकने की धमकी धमकी के विरोध में दिए अपने वक्तव्य में कहा था- “दिखने के यह विरोधाभास सा लग सकता है, लेकिन सत्य वास्तव में यही है कि क्या पुराने युग में और क्या वर्तमान जनतंत्र के युग में, सत्ता और शक्ति का आधार जनसाधारण ही रहा है|”

इतिहास में प्रजा द्वारा अपने राजा के प्रति असीम प्यार और नफरत के उदाहरण भरे पड़े है| ऐसा ही जयपुर के शिशु राजा रामसिंह जी के प्रति जनता की भावनाएं इस उदाहरण से समझी जा सकती है कि जयपुर की प्रजा अपने राजाओं से कितना प्रेम करती थी|

महाराजा सवाई रामसिंह जी गद्दी पर विराजे तब उनकी आयु मात्र छ: माह थी| ऐसी स्थिति में उनकी माताजी राज कार्य संभालती थी| राजमाता के कई मर्जीदान जैसे झुंथाराम, हुकमचंद आदि शक्तिशाली हो गए और जिम्मेदार पद कब्ज़ा लिए| लेकिन उनकी मनमानी व अन्य सामंतों के विरोध स्वरूप गवर्नर जनरल के एजेन्ट ने उन्हें हटाकर दौसा के किले में कैद करवा दिया और रावल श्योसिंह को राज्य का व्यवस्थापक नियुक्त कर दिया| झुंथाराम और उसके साथियों ने रावल की हत्या और उन्हें असफल करने के उद्देश्य से योजना बनाई| 30 जून 1837 को ब्रिटिश एजेन्ट लाकेट रावल को पदासीन कराने आया तो झुंथाराम के साथियों ने लाकेट पर तलवार से हमला किया| एजेन्ट लाकेट के सहायक ब्लेक ने हमलावर को पकड़ लिया और खून से सनी तलवार को उसके हाथ से छीन ली| घायल लाकेट को सुरक्षित एजेंसी के बंगले में भेज दिया|

ब्लेक खून से सनी तलवार हाथ में लिए हाथी पर सवार होकर जैसे ही महल क्षेत्र से बाहर दरवाजे की और बढ़ा, षड्यंत्रकारियों ने अफवाह फैला दी कि अंग्रेज अफसर ने शिशु महाराजा की हत्या कर दी| बस फिर क्या था, प्रजा उसके पीछे पड़ गई| कुली हिदायतुल्ला खां ने दरवाजा बंद कर दिया| प्रजा के हमले में ब्लेक का चपरासी मारा गया और ब्लेक का महावत हाथी को भगाकर मीणों के मंदिर के पास ले गया| ब्लेक मंदिर की छत पर चढ़ गया| मंदिर में उपस्थित मीणों ने भी जब शिशु महाराजा के कत्ल की अफवाह वाली चिल्लाहट सुनी तो उन्होंने भी ब्लेक पर हमला कर दिया| ब्लेक की हत्या कर उसका शव बाजार में लाकर डाल दिया गया| ब्लेक के तीन चपरासियों, एक छड़ी बरदार और महावत की भी जनता द्वारा मौके पर ही हत्या कर दी गई|

यह घटना प्रजा के मन में अपने राजा के प्रति असीम प्यार को प्रदर्शित करती है कि प्रजा ने अपने शिशु महाराजा की हत्या की अफवाह मात्र सुनकर अंग्रेज अधिकारी व उसके सहायकों को मार डाला|