अखबारों की सुर्खिया कहती है

अखबारों की सुर्खिया कहती है

तुम्हारे थोड़े से राशन बचाने से ,बच नहीं जाएगी उसकी लाज
टूट पड़ेगा गिद्ध सा , घर से भूखा निकला हैं वो आज
ये क्या बचकानी हरकते करती हो तुम ?
कुछ सेंडविच ज्यादा क्यों नहीं बना लेती
हर बार थोड़ा थोड़ा बचाती रहती हो
बासी हो जाएगी ये ब्रेड ,
तब भी तो फैंकना ही पड़ेगा ना
खाना थोड़ा ज्यादा बनाया करो
पतीला थोड़ा बड़ा चढ़ाया करो
तुम्हारी दिनचर्या में शामिल कर लो
देखो ख्याल रहे
ये तुम्हारा गबरू जवान बेटा
और पति घर से भूखा ना निकले
कि अखबारों की सुर्खियाँ कहती है ऐसा
भूखे भेड़ियों से टूट पड़े थे वो
उस मासूम पर
कोमां में है वो
होश आयेगा पर ,ताउम्र उसका दर्द नहीं जायेगा
फ्रिज में रखा करो कुछ फ़ास्ट फ़ूड जैसा
तुम्हारा फ्रिज भरा रहेगा , तो किसी का घर आबाद रहेगा
इतने में भी ना मिटे , अगर भूख उसकी
तो अपने उतरे कपड़े मुँह मे ठूस दो इसके
चिपका दो अपने घर की दीवारों पर
इनकी बेटियों और बहनों की अर्धनग्न तस्वीरे
देख कर अगर चीखे , तो ला खड़ा करना उस बाप को सामने
जो अभी अभी अपनी चिड़िया के कतरे पंख .. समेट के आया है
तुम्हारा इनको बचाना .. किसी का सब लुट जाना है
एक औरत की चुप्पी ,दूसरी की चीख हो जाएगी

उषा राठौड़

8 Responses to "अखबारों की सुर्खिया कहती है"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.