राजस्थानी प्रेम कहानी : ढोला मारू

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है .

जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से !

मै यहाँ एक ऐसे स्थान की चर्चा करने जा रहा हूँ जहाँ इन्सान की मौत के बाद उसकी पूजा के साथ ही साथ उसकी बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है.

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक

एलोवेरा शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ ब्लॉग के लिए भी एक बढ़िया टॉनिक है , एक बढ़िया की-वर्ड जो गूगल से आसानी से पाठक झटक कर आपके ब्लॉग पर ट्रैफिक बढ़ा सकता है |.

"उबुन्टू लिनक्स" इसका नाम तो बाली होना चाहिए था

उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी शेखावत

आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी |.

Feb 16, 2012

लादड्या में रहणों है तो जै ठाकुर जी की कैणी पड्सी

लादड्या में रहणों है तो जै ठाकुर जी की कैणी पड्सी = दबंग की ही चलेगी|


संदर्भ कहानी:-

लादड्या नामक गांव में एक ताऊ रहता था उसके परिवार में उसके अलावा कोई नहीं था और न ही वह जीविका के लिए कभी कोई काम करता था| उसी गांव में एक अंधा फकीर भी रहता था| जो रोज सुबह झोली लेकर घर घर फैरी लगाकर मांगता,वह जिस घर में जाता वहां ऊँची आवाज में बोलता "जय ठाकुर जी की"| गांव में इस तरह फैरी लगाकर मांगने वाले को ज्यादातर लोग आटा देते है| सो अंधे फकीर की झोली भी आटे से रोज भर जाती थी|

अंधा फकीर ताऊ के झोपड़े पर जाकर भी "जय ठाकुर जी" बोलता, पर ताऊ उसकी झोली में आटा डालने के बहाने एक कटोरा भर कर आटा निकाल लेता| इस तरह ताऊ भी अपना खाने का जुगाड़ कर लेता पर कुछ दिन बाद अंधे फकीर को ताऊ की कारिस्तानी का पता चल गया और उसने ताऊ के झोपड़े पर जाकर "जय ठाकुर जी" कहना बंद कर दिया|

अंधे फकीर के न आने पर ताऊ को बड़ा गुस्सा आया और उसने गांव की चौपाल पर ही अंधे फकीर को जा पकड़ा और उसके यहाँ न आने का कारण पूछा| फकीर ने भी बहाना बनाया कि- उसे सभी घरों में जाने की जरुरत नहीं है कुछ घरों से मांगने पर ही उसका काम चल जाता है|

पर ताऊ ठहरा आखिर ताऊ! उसने अंधे फकीर को धमकाते हुए कहा- "लादड्या में रहणों है तो जै ठाकुर जी की कैणी पड्सी" अर्थात इस गांव में रहना है तो मेरे झोपड़े पर भी आकर "जय ठाकुर जी की" कहना पड़ेगा|
बेचारा अंधा फकीर क्या करता? उसने सोचा इस दबंग ताऊ से पंगा लेना बेकार है और वह हर रोज पहले की तरह ताऊ के झोपड़े पर झोली लेकर जाने लगा|

Feb 14, 2012

बनिये की राम राम और मिस्ड कॉल

बनिये की राम राम = उधारी का तकादा

गांव में अक्सर बनिये (दुकानदार) अपने किसी भी देनदार से सीधे उधारी का तकादा नहीं करते, शायद कोई बुरा मान जाय और आगे से उसकी दूकान से उधार सामान ही ना ख़रीदे| और तकादा ना करे तो उधारी कैसे वसूल हो इसलिए पैदायशी एमबीए डिग्रीधारी बनिया कभी अपने ग्राहक से उधारी का तकादा सीधे नहीं करता|

पर जब भी देनदार उसके सामने आता है तब बनिया दूर से ही उससे अभिवादन के लिए एक अलग ही शैली से "राम-राम" करता है कि सामने वाला समझ जाता है कि बनिया "राम-राम" नहीं कर रहा अपनी उधारी का तकादा कर रहा है| इस तरह अपनी शैली में बनिया अभिवादन के बहाने उधारी का तकादा कर लेता है जिससे सामने वाला नाराज भी नहीं होता और तकादा भी हो जाता है|

लेकिन अब जमाना बदल रहा देश में नई नई तकनीक आ रही है तो बनिया(व्यापारी) भी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपनी अपनी उधारी का तकादा करने हेतु नई शैली मिस्ड कॉल के जरिये अपना रहे है| अब जिससे उधारी का तकादा करना हो उसे अपने मोबाइल से मिस्ड कॉल कर देते है सामने वाला देनदार भी समझ जाता है कि यह मिस्ड कॉल उधारी का तकादा है यदि चुकाने को है तो तुरंत फोन उठा लेता है और नहीं है तो कॉल मिस्ड ही रह जाती| ऐसा एक उदाहरण मेरे सामने आज से लगभग दो साल पहले आया था-

दो साल पहले मैं अपनी कम्पनी के लिए कपड़े की छपाई के सिलसिले में जोधपुर महेश जी खत्री के कारखाने में गया हुआ था| उन्हें दिल्ली की एक परिधान निर्यातक कम्पनी से कपड़े की छपाई के रूपये लेने थे, वे मेरे सामने उस कम्पनी के मालिक को दो दिन से लगातार दिन में कई कई बार फोन कर रहे थे सामने वाला फोन नहीं उठा रहा था और महेश जी हर कुछ घंटो बाद उसे एक मिस्ड कॉल कर देते| मैंने उनसे कहा कि जब वो फोन नहीं उठा रहा तो अब मिस्ड कॉल करने का क्या फायदा ?
महेश जी का जबाब था कि -"ये तो बनिये वाली राम-राम है" कल तक इसका असर देखना और यही हुआ तीसरे दिन देने वाले ने उनके बैंक खाते में चैक जमा करने के बाद ही फोन उठाया|

आखिर बनिये की राम-राम भी तकनीकी के युग में मिस्ड कॉल में बदल गयी|

मैं भी अक्सर किसी से अपने पेन्डिंग काम को करवाने की याद दिलाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करता हूँ, मिस्ड कॉल से सामने वाला समझ जाता है कि अपने बाकि काम को जल्द निपटाने की याद दिला रहा है|

Feb 10, 2012

कंप्यूटर की फाइल में लिखा शब्द कैसे खोजें ?

कंप्यूटर में किसी फाइल को उसके नाम से खोजने का सर्च औजार तो है पर यदि आपको किसी फोल्डर में रखी ढेरों फाइलस में से कोई एक शब्द खोजना हो तो विंडोज में ऐसा कोई औजार नहीं है| पर अंतर्जाल पर ऐसे ढेरों मुफ्त औजार उपलब्ध है जिनकी मदद से आप किसी भी फोल्डर में सहेजी ढेरों फाइलस में से किसी एक पर या ज्यादा पर लिखा कोई खास शब्द खोज सकते है| आईये आज चर्चा करते है इस शानदार शब्द खोजी औजार के बारे में -
१- सबसे पहले इस मुफ्त औजार को यहाँ चटका लगाकर डाउनलोड करें|
२- अपने कंप्यूटर में इसे संस्थापित करने के लिए इसके सेटअप पर दो बार क्लिक कर इसे रन करें|

३- चित्र में दिखायेनुसार खुली विंडो में सी ड्राइव में इसे रखने के लिए फोल्डर का कोई नाम दे या इसमें लिखित डिफाल्ट फोल्डर का नाम search ही रहने दे व चित्र में संख्या २ के पास अनजिप बटन पर चटका लगा दें| अब यह औजार आपके कंप्यूटर में संस्थापित हो चूका है|
४- अब किसी भी शब्द को खोजने के लिए ड्राइव सी में जाकर सर्च फोल्डर को खोलें और वहां इस औजार पर चटका लगाकर इसे चलायें|


५- चित्र में दिखाई जगह उस फोल्डर को चुनिए जिसमे सहेजी किसी फाइल पर लिखा खास शब्द आपको खोजना है जैसे मैंने अपने कंप्यूटर में Bloger के नाम से एक फोल्डर बना रखा है और उसकी किसी फाइल पर ललित शर्मा जी का फोन न. लिखा है पर मैं भूल गया कि उनका न. किस फाइल पर लिखा है|
इसलिए मैंने इस औजार की विंडो में वह ब्लोगर नाम का फोल्डर चुन लिया है |

६- फोल्डर चुनने के बाद चित्र में दिखाई जगह मैंने वह शब्द लिखा जिसे मैंने खोजना था जैसे- lalit sharma लिखा और स्टार्ट बटन पर चटका लगा दिया|

७- और कुछ ही क्षण में इस औजार ने नीचे चित्र में दिखायेनुसार मुझे उस फाइल का नाम खोज दिया जिसमे ललित शर्मा का नाम लिखा है|


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Feb 1, 2012

रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया : कुं.अमित सिंह

रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया,
आजकल का रंग -ढंग कैसा अजब हो गया|

जो वस्त्र होता था नीचा वो ऊँचा ,
और जो होना था ऊँचा वो नीचा हो गया|
...
जब तक "जोकी" लिखा न दिखे ,इनको आता चैन नहीं
अगर करे कोई टोका-टोकी होता इनको सहन नहीं
कन्यायें भी त्याग रही पहनावे के सरे संस्कार
टॉप हो रहा ऊँचा -ऊँचा,भूल गयी सूट-सलवार|

अब हम भी क्या कहें,कई माँ-बाप ही देते हैं उनका साथ,
फैशन करने में वो भी आगे हैं उनसे दो हाथ|

माँ ये सोचे,समझें सब उसको बेटी की बहन,
बाप को भी बेटी की सहेली का अंकल कहना नहीं सहन|

हे मेरे मालिक तुमने "अमित" के साथ ये क्या गजब किया
क्या मैं इसके लायक था, जो मुझे ये सब देखने भेज दिया|

मेरे भाइयो और बहनों न भूलो अपना सनातन इतिहास
आधुनिक बनो पर ऐसे कि कोई उड़ा न सके आपका उपहास||

''जय श्री राम''
AMIT KUMAR SINGH

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