May 18, 2012

पूर्व राष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी द्वारा "विरासत रक्षा" का काव्य वर्णन

राजस्थान में स्थित ऐतिहासिक किले, राजमहल, हवेलियाँ राजस्थान की ही नहीं भारत सहित पुरे विश्व की धरोहर है| इस धरोहर व राजस्थान की इस ऐतिहासिक विरासत को बचाए रखने में स्व.भैरोंसिंह जी द्वारा अपने मुख्यमंत्री काल में इन्हें हेरिटेज का दर्जा देना बहुत सहायक सिद्ध हुआ| स्व.भैरोंसिंह जी के प्रयासों से ही आज राजस्थान की वे पुरानी हवेलियाँ व अन्य ऐसी इमारतें जो ढहने के कगार पर खड़ी थी| हेरिटेज होटल्स में तब्दील होकर बच तो गयी ही साथ ही प्रदेश में पर्यटन बढाकर रोजगार के अवसर भी बढ़ा दिए|

स्व.भैरोंसिंह जी द्वारा राजस्थान की विरासत की रक्षा के लिए किये कार्य का वर्णन राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी,भगतपुरा ने राजस्थानी काव्य में इस तरह किया है-

किला कचहड़ी कोटड्या, बिकती खुलै बजार|
गौरव कीरत गोखड़ा, ढह कर होता ढार||
गोख झरोखा साल संग, कारीगरी कपाट |
दुड़ता झड़ता कांगरा, होता सपम्म पाट ||

मंडिया भीतां मांडणां, राख्या बिकतां वार |
किला कंगूरा तीरकस, छात पट्टी सिलधार ||
देवल जूनी देवरया, छन्न्यां लिखिया लेख |
महतब समझां आपनै, देख देख फिर देख ||
डैरव री डम डम डकर, भैरव बोल विचार |
गुण गहीर गुण गरजना, पूग विदेसा पार ||
राजनीति रणरा रसिक, राज राज रा हंस |
पयठ प्रतिष्ठा असेम्बली, पाई पूर प्रसंस ||
विधायक भाषण विविध, तरक तराजू तोल |
गुण अवगुण आधार पर,कियो सांचलो मोल ||
पय पाणी री न्याय विध, राजहंस री रीत |
कूड़ छाण अलगी पटक,दरसाई सच जीत ||

ठा. सौभाग्य सिंह शेखावत १५ जनवरी २००४

7 comments:

  1. स्व.भैरोंसिंह जी का राष्ट्र प्रति सराहनीय योगदान रहा,.....उनको मेरा कोटि२ नमन,,,,

    ठा. सौभाग्य सिंह शेखावत की बहुत सुंदर रचना,..

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,

    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

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  2. काव्य रूप में सुन्दर वर्णन ... बढ़िया प्रस्तुति ...आभार

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  3. भैरूसिंघजी रौ औ पांवड़ौ राजस्थानी धरोहर नै बचावण खातर एक सिरावणजोग पैल ही.

    सौभाग्यसिंघजी इण पैल रौ आछा सबदां मांय़ बखाण कर्‌यौ छै.

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  4. thanks for this beautiful post.

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. भेरो सिंह जी मेरी नजर मे राजस्‍थान के भागीरथ से कम नही है यूनिक तकनीकी ब्‍लाग

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  7. शब्‍दश: तो नहीं समझ पाया किन्‍तु केन्‍द्रीय भव अनुभव कर पा रहा हूँ। अच्‍छा है।

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