7

राजस्थान में स्थित ऐतिहासिक किले, राजमहल, हवेलियाँ राजस्थान की ही नहीं भारत सहित पुरे विश्व की धरोहर है| इस धरोहर व राजस्थान की इस ऐतिहासिक विरासत को बचाए रखने में स्व.भैरोंसिंह जी द्वारा अपने मुख्यमंत्री काल में इन्हें हेरिटेज का दर्जा देना बहुत सहायक सिद्ध हुआ| स्व.भैरोंसिंह जी के प्रयासों से ही आज राजस्थान की वे पुरानी हवेलियाँ व अन्य ऐसी इमारतें जो ढहने के कगार पर खड़ी थी| हेरिटेज होटल्स में तब्दील होकर बच तो गयी ही साथ ही प्रदेश में पर्यटन बढाकर रोजगार के अवसर भी बढ़ा दिए|

स्व.भैरोंसिंह जी द्वारा राजस्थान की विरासत की रक्षा के लिए किये कार्य का वर्णन राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी,भगतपुरा ने राजस्थानी काव्य में इस तरह किया है-

किला कचहड़ी कोटड्या, बिकती खुलै बजार|
गौरव कीरत गोखड़ा, ढह कर होता ढार||
गोख झरोखा साल संग, कारीगरी कपाट |
दुड़ता झड़ता कांगरा, होता सपम्म पाट ||

मंडिया भीतां मांडणां, राख्या बिकतां वार |
किला कंगूरा तीरकस, छात पट्टी सिलधार ||
देवल जूनी देवरया, छन्न्यां लिखिया लेख |
महतब समझां आपनै, देख देख फिर देख ||
डैरव री डम डम डकर, भैरव बोल विचार |
गुण गहीर गुण गरजना, पूग विदेसा पार ||
राजनीति रणरा रसिक, राज राज रा हंस |
पयठ प्रतिष्ठा असेम्बली, पाई पूर प्रसंस ||
विधायक भाषण विविध, तरक तराजू तोल |
गुण अवगुण आधार पर,कियो सांचलो मोल ||
पय पाणी री न्याय विध, राजहंस री रीत |
कूड़ छाण अलगी पटक,दरसाई सच जीत ||

ठा. सौभाग्य सिंह शेखावत १५ जनवरी २००४

Post a Comment

 
Top