ज्ञान दर्पण के लेख इन्टरनेट पर दुबारा कहीं भी प्रकाशित करना सख्त मना है| पर प्रिंट मिडिया में नाम सहित छापने की खुली छूट है|

Feb 10, 2010

उत्तरा की मांग

"मै युद्ध प्रयाण कर रहा हूँ | पिताजी आज यहाँ नहीं है | अपने हाथ दिखाने का स्वर्णिम अवसर आया है | श्री कृष्ण ने कहा है कि ऐसा अवसर भाग्यवान क्षत्रिय को ही मिलता है | मुझ पर आज भाग्य प्रसन्न हुआ है |"
उसकी आँखे नीची ही रही |
' मै महारथियों से भिडूगा - अकेला होते हुए भी उनके दांत खट्टे करूँगा | दुनियां को दिखा दूंगा कि पुत्र पिता से भी बढ़कर है | माता जी से स्वीकृति ले आया हूँ |'
उसने आँखे नीची ही रखी |
' मै तुमसे विदा लेने आया हूँ -शायद इस संसार की यह अंतिम विदा ही हो |'
वह उठ खड़ी हुई पर उसने अपने आँखे नहीं उठाई |
' क्या तुम भी माता जी की भांति सोच रही कि मै छोटा हूँ ,अनुभवी नहीं हूँ | मेरा कितना दुर्भाग्य है कि लोग मुझे बच्चा ही समझते है ,कैसे सिद्ध करू कि प्रोढ़ता की कसौटी उम्र नहीं ,दायित्वों के प्रति तीव्र और गहन तादात्म्य है | मै कितना ही छोटा हूँ -मेरे सामने मेरा नहीं मेरे कुल की प्रतिष्ठा का प्रश्न है , मेरे स्वजनों के सम्मान का सवाल है , माँ के दूध और तुम्हारे सुहाग को मै लज्जित नहीं कर सकता | क्या तुम्हे मुझ पर इतना भी विश्वास नहीं है ?'
' मुझे विश्वास तो है परन्तु ..........'
परन्तु क्या ?.............
' मेरे सामने मेरे कर्तव्य का प्रश्न है मै क्या करूँ ? आप तो रण में अपना कौशल दिखायेंगे और मेरे कौशल के क्षेत्र तो सभी रुंधे हुए है | आपके कर्तव्य पालन को तो सभी लोग देखेंगे किन्तु मेरा भी तो कोई कर्तव्य होगा और मेरे उस कर्तव्य पालन को कौन देखेगा ? स्त्री योनी में जन्म देकर भगवान ने आप जैसे पति के साथ लगाकर भी मुझे कितना पीछे रख दिया है ? हमारे अरमान कोई नहीं समझता , हमारी आकांक्षाएं कोई नहीं सुनता ,हमारे कर्तव्य को कोई नहीं देखता ,हमारे दुखों को हमारे सिवाय सहन ही कौन कर सकता है ?'
' देवी ! मैंने तुम्हारा पाणिग्रहण किया है | तुम्हारे साहचर्य में रहकर मैंने तुम्हारी आकांक्षाओं ,अरमानो और कठिनाईयों का अनुभव किया है | मेरा कर्तव्य ही तुम्हारा कर्तव्य है | मुझे हंस कर विदा दो , कुमकुम लगाकर विदा दो | मै जनता हूँ मेरे कर्तव्य से तुम्हारा कर्तव्य कठिन है | तुम्हे मेरी धरोहर को सुरक्षित रखना है , मेरे वियोग की आग में जलना है , हृदय पर पत्थर रखकर भी विदा देना है | मेरा सरल कर्तव्य निभाने में योग दो , तुम्हारा कठिन कर्तव्य निभाने में भगवान तुम्हारी सहायता करेंगे |'
और विदा पाकर अभिमन्यु वीर की भांति चला युद्ध में |
क्रमश :.........





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एलो वेरा जेल कुदरत का चमत्कार ( एच आई वी / एड्स प्रभावित के लिए )

6 comments:

बेहतरीन!!

बहुत आभार!

उत्तरा की पुकार को अनसुना कर चले अभिमन्यु की अगली कड़ी की प्रतीक्षा रहेगी ....!!

Aap ke blog se kafi jankari mil rahi hai.

http://guide-india.blogspot.com

बहुत सुंदर, अगली कडी की प्रतिक्षा है.

रामराम.

उत्तरा, उर्मिला, सीता, राधा --- हर की व्यथा है।

वीरो के गुणों को बखान करती सुन्दर पोस्ट

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