कल सुबह उठते ही हमेशा की तरह कंप्यूटर चालू कर जैसे ही ब्लॉग वाणी खोला वहां ब्लॉग वाणी टीम द्वारा विदाई सन्देश पढ़कर मन बहुत दुखी हुआ | विदाई सन्देश पढ़ते ही बात समझ आ गयी कि कुछ टांग खेंचू ब्लोगर्स के द्वारा बार बार ब्लॉग वाणी पर बेवजह झूंठे आक्षेप लगाने वाली पोस्टों की वजह से ब्लॉग वाणी टीम ने दुखी हो यह कदम उठाया है | थोडी देर बाद ही चिट्ठजगत पर इस मुद्दे पर समीर जी की पोस्ट के साथ ही ब्लॉग वाणी टीम से ब्लॉग वाणी को दुबारा चालू रखने के अनुरोध वाली ढेरों पोस्ट दिखाई दी . हर पोस्ट की टिप्पणियों में ब्लॉग वाणी से इसे चालू रखने का अनुरोध किया गया | इतनी मिन्नतों के बाद मुझे लग रहा था कि कल तक शायद ब्लोगवाणी फिर से दिखाई देने लगे लेकिन आज सुबह ब्लॉग वाणी पर साफ़ सन्देश पढने को मिला कि अब ब्लॉग वाणी उपलब्ध नहीं है |
भारत में अभी ज्यादा स्पीड वाला इन्टरनेट कनेक्शन महंगा व हर जगह उपलब्ध नहीं होने कारण ज्यादातर लोग कम गति वाला इन्टरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करते है जिसमे चिट्ठाजगत खोलने में थोडी दिक्कत आती है कम गति के कनेक्शन में ब्लॉग वाणी का इस्तेमाल आसान था यही कारण है कि चिट्ठाजगत से तकनीकी रूप से पिछड़ा होने के बावजूद ज्यादातर ब्लोगर ब्लॉग वाणी को ज्यादा पसंद करते थे जिनमे से मै भी एक हूँ अब चूँकि ब्लॉग वाणी बंद हो चूका है पता नहीं ये चालू होगा भी या नहीं अतः हमें इन्टरनेट पर उपलब्ध अन्य हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर को प्रोत्साहन देना चाहिए , चिट्ठाजगत के अलावा भी कई एग्रीगेटर इन्टरनेट पर उपलब्ध है जिनकी हमें प्रयाप्त जानकारी नहीं है अतः सभी से अनुरोध है कि ऐसे एग्रीगेटर की जानकारियां दे जिनसे ब्लोग जगत अभी तक अनभिज्ञ है |
साथ ही रफ्तार हिंदी खोज के ब्लॉग एग्रीगेटर व हिंदी ब्लॉग . कॉम आदि को बढ़ावा दे ताकि हम किसी एक एग्रीगेटर पर निर्भर ना रहे |
साथ चिट्ठाजगत आदि पर उंगुली उठाने वाले को तुंरत एसा जबाब दे ताकि इस तरह की टांग खिंचाई बंद हो और ब्लॉग वाणी जैसा हादसा दुबारा न हो |
राजस्थान के समाचार पत्र मे आज़ाद पुलिस
28 minutes ago





सहमत भाई सहमत !
ReplyDeleteमन दुखी है और आपसे सहमत!
ReplyDeleteआपsसे सहमत हूँ आपका धन्यवाद हम जैसे अनजान ब्लाग्र्स को दिशा दिखाने के लिये ब्लागवाणी बन्द होने से दुखी हूँ धन्यवाद्
ReplyDeleteहम तो काफी पहले से रफ्तार के साथ तेज रफ्तार से शामिल हैं। वैसे ब्लागवाणी की वापसी हो चुकी है।
ReplyDeleteदुखित मन से आपसे सहमत हैं.
ReplyDeleteरामराम.
कल दिन भर हम परेशान रहे. चिट्ठाजगत खुल भी नहीं रहा था. आज दोनों हाजिर हैं. ब्लोग्वानी अब वापस आ गयी है..अब हम खुश हैं
ReplyDelete'raftar' se bhi juda gaye ji...
ReplyDeletejankari dene ke lien ABHAR
चलो अब खुश हो जाओ आज दोनो ही खुल रहे है, ओर आप का धन्यवाद
ReplyDeleteअब सब कुछ पहले जैसा हो गया है । फिलहाल मस्त रहें । वैसे रफ्तार से भी जुडे़ रहें तो बेहतर !
ReplyDeleteaapse mai sahmat hoon, aap thik kah rahe hai.
ReplyDeleteहिन्दीकुंज
मै तो दोनो का ही इस्तेमाल नही कर पाता हूँ। केवल फीड द्वारा ही चिठ्ठे पढता हू ।
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