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Jan 9, 2009

हिन्दी लिखने में शर्म क्यों ?

आज से १५ महीने पहले इन्टरनेट कनेक्शन लेने के बाद कुछ वेबसाइट देख मुझे एक कम्युनिटी वेब साईट बनाने की हुड़क लगी लेकिन मुझे इस संबंद में कोई जानकारी नही थी बस अंतरजाल पर सिर्फ़ वेबसाइट खोलना और गूगल सर्च करना ही बच्चों से सीख पाया था और उन्ही की सलाह पर वेबसाइट कैसे बनाई जाए गूगल पर सर्च कर कुछ ट्युटोरियल पढ़े और होस्टिंग लेकर प्लेक्स कंट्रोल पेनल के साईट बिल्डर से वेबसाइट तो बना ली लेकिन मेरी साईट में लोगों को सदस्यता देने का प्रावधान नही था अतः साईट में यह सुविधा बढ़ाने के लिए मैंने एक वेब मास्टर से संपर्क किया और उन्हें अपनी वेबसाइट दिखाई, मेरी वेबसाइट में हिन्दी में लिखे लेख देखकर वे वेबमास्टर महोदय हँसे और टिप्पणी की कि भाई साहब आप अंग्रेजी में क्यों नही लिखते | आपकी हिन्दी साईट कौन पढेगा ? इन्टरनेट पर तो सब अंग्रेजी पढ़े लिखे लोग है हिन्दी में लिखकर क्यों अपना समय बर्बाद कर रहें है |
मैंने उन्हें बताया कि मै अपने विचार अपनी मातृभाषा में जितने सशक्त ढंग से व्यक्त कर सकता हूँ उतने विदेशी भाषा में नही कर सकता और जिन लोगों तक मुझे अपने विचार पहुचाने है वे सब हिन्दी लिख-पढ़ सकते है भले ही वे अंग्रेजी भी जानते हों तो भला मै क्यों अंग्रेजी में माथापच्ची करूँ | और आने वाले समय में देखना इन्टरनेट पर भी हिन्दी की धूम रहेगी हालाँकि मुझे उस वक्त तक हिन्दी ब्लॉगजगत के बारे जानकारी नही थी वरना मै एक दो हिन्दी ब्लॉग खोलकर ही उनकी बोलती बंद कर देता | और उन्हें यह बताकर की अब तो इस साईट पुरी सुविधों के साथ ख़ुद ही तैयार करूँगा और अपनी हिन्दी वेब साईट की रेंक आपकी वेबसाइट से ज्यादा अच्छी करके दिखाऊंगा |
और उनकी टिप्पणी ने मेरा हिन्दी लिखने का व अपनी हिन्दी भाषी वेब साईट सदस्यों के लिए कई सारी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का इरादा और मजबूत कर दिया | और गूगल बाबा की सर्च की सहायता से मैंने ये सब कुछ ही दिनों में हासिल भी कर लिया अब मेरी कम्युनिटी वेब साईट में ३०० सदस्य है २०से ज्यादा देशों में खुलती है और रोजाना ३००० से ज्यादा पेज व्यू है सदस्यों के लिए साईट चेट,म्यूजिक,फोटो,ब्लॉग,आर्टिकल्स ,इवेंट्स,विचार विमर्श फॉरम,दोस्त बनाना,दोस्तों को मेसेज भेजना आदि ढेरों सुविधाएँ है ये भी सिर्फ़ होस्टिंग के खर्चे में बाकि सब फ्री ! और हाँ होस्टिंग और मेरे इन्टरनेट कनेक्शन का खर्च भी इस वेबसाइट पर लगे गूगल बाबा के विज्ञापन से मिल जाता है |
मेरी यह वेबसाइट ठीक-ठाक चलने के बाद मै एक दिन फ़िर उन वेबमास्टर महोदय से मिला और उन्हें अपनी साईट दिखा उसकी अलेक्सा रेंक व गूगल विश्लेषण दिखाया जिसे देखने के बाद वे महोदय बगलें झाँकने लगे |
उपरोक्त प्रकरण लिखने का मेरा उदेश्य यही बताना था कि कैसे हम लोग ही अपनी मातृभाषा का मजाक उडते है ? और अपनी ही भाषा की समृधि में रोड़ा बनते है हम क्यों अपनी मातृभाषा में लिखने में शर्म महसूस करते है ? आख़िर हम अपने विचारों की अभिव्यक्ति अपनी मातृभाषा के अलावा कैसे एक विदेशी भाषा में सशक्त तरीके में कर सकतें है ?

10 comments:

आपका सोच बिल्कुल सही है. इसी तरह कुछ ठोस करने से ही एक हिन्दी भी शिखर पर पहुंच जायेगी और हम क्यों शर्म करें? बहुत बढिया.

रामराम.

ख्योंखी हम सोचता है खी stupid लोग हिन्दी में लिखता है. तुम काला लोग कैसा हिन्दी में लिखेगा !!

आपने सही फरमाया, हमारी इज्‍जत हमारे ही हाथ है, चाहे तो बना लें, चाहे बि‍गाइ़ लें।

हम सपने जब हिन्दी में ही देखते है तो लिखने में कैसी शर्म!

पता नहीं क्यों लोग-बाग हिन्दी लिखने में और बोलने में हिचकते हैं। मुझे गर्व है कि मैं हिन्दी भाषी हूं और हिन्दी में लिखने में सक्षम हूं।

सचमुच आपने भाड फोडकर दिखा दिया।

सारे चने नहीं फोड सकते, पर कुछ सख्‍त चने भाड भी फोड सकते हैं।

सही बात सही शब्दों में

हिन्दी वाली बात तो अपनी जगह ठीक है .

पर शेखावत जी हम तो एक बात सोचते हैं :

मेहनती हो तो आप जैसा और आलसी हो तो हमारे जैसा .
न जाने कब से वहीं के वहीं हैं हम :)

आपकी सोच बहुत ही आगे कि है । आपने जो बीज बोये है उनके पेड जब तैयार हो जाये तब देखियेगा चारो ओर हिन्दी कि हरियाली दिखायी दे गी । वैसे मै भी इस कम्यूनिटी वेब साइट का सदस्य हू ओर मुझे इस बात पर गर्व है ।

इस आशावाद को मेरा सलाम है |

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